पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • बिल्डिंग बाॅयलाज 2010 में चेंज, रेगुलर होंगे निगम हद में बने मैरिज पैलेस

बिल्डिंग बाॅयलाज 2010 में चेंज, रेगुलर होंगे निगम हद में बने मैरिज पैलेस

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
(पटियाला में रोज मार्केट की इन्हीं दुकानों को बेंचा जाना है।)
पटियाला। नगर निगम ने शहर के विभिन्न इलाकों में रेंट पर दी अपनी 196 दुकानों लीज पर दी 121 जगहों को खुली बोली से बेचने का फैसला लिया है। प्रस्ताव हाउस में 19 को होने वाली जनरल हाउस की मीटिंग में पेश किया जाएगा। प्रस्ताव में बताया गया है कि फाइनेंशियली क्राइसिस से गुजर रहे निगम को इस तरह अपनी जमीन बेचकर काफी आमदनी होगी। दुकानों/जगहों का कुल रकबा 44 हजार 558 वर्ग गज बनता है। प्रॉपर्टी को अगर एरिया वाइज मौजूदा कलेक्टर रेट के साथ बेचा जाए तो इससे लगभग 266 करोड़ रु प्राप्त हो सकते हैं।
कानूनी सलाहकार ने 14 दिसंबर 2007 को राय दी थी कि निगम की सभी दुकानों/जगहों जो किराए लीज पर है, पिछले लंबे समय से कब्जाकार/किराएदार/सबलैटी बहुत कम किराए पर बैठे हैं। इनसे निगम को बहुत कम किराया हासिल होता है। डीसी ने इन जगहों का रेट निर्धारित करने के बाद अगर वो सहमित दे तो उन्हें ही यह जगह बेच दी जाए।

निगम की रेंट पर दी शॉप मार्केट्स में बस स्टैंड के पास रोज गार्डन मार्केट, घास मंडी मार्केट, मूंगफली मार्केट, शेरां वाला गेट के पास मार्केट, लाहौरी गेट मार्केट (जहां राजस्थानी पुराने कपड़े बेचते है), किले के पीछे ट्रंक पेटी बनाने वाली मार्केट, बरूद खाना मार्केट शामिल है। 21 अप्रैल 1999 को सरकार ने हिदायत की थी कि मौजूदा सालाना किराए का 10 गुणा ट्रांसफर फीस लेकर डीसी के तय कलेक्टर रेट लेकर प्रॉपर्टी को कब्जाकार के नाम पर ट्रांसफर कर दिया जाए। अगर दुकानदार इसे खरीदना नहीं चाहता तो इस प्रॉपर्टी को खुली बोली से बेचा जाए।
फैसले पर हाईकोर्ट ने यह कह कर रोक लगा दी थी कि किसी भी प्रॉपर्टी को अदालत के हुक्मों से बिना बेचा जाए। बाद में इन सभी रिटों को डिस्पोज ऑफ कर दिया गया। 30 जुलाई 2000 को पंजाब सरकार ने कैबिनेट में पास किया था कि जो दुकानें निगम ने किराए पर दी हुई है और जिनको खाली करवाने में वो असमर्थ है, को एक कमेटी का गठन करके मार्केट कीमत का 40 फीसदी कीमत वसूल करके संबंधित कब्जाकार को बेच दिया जाए। जिन कब्जाकार को छत के अधिकार दिए जाए, उनको मार्केट कीमत का 50 फीसदी वसूला जाए। हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने 2002 में एक रिट पटीशन पर इन आदेशों को रद किया जाए।
सरकार ने भी डाली निगम पर 30 लाख की बगार: पहले ही गौ चारा फंड से पैसे निकाल कर मुलाजिमों को वेतन देने वाले निगम के ऊपर सरकार ने और वित्तीय बोझ डाल दिया है। पंजाब म्यूनिसिपल भवन के निर्माण के लिए पंजाब सरकार ने निगम से 30 लाख रु मांगे है। निगमों द्वारा यह रकम वैट में से काट ली जाएगी। हालांकि यह रकम 4 किश्तों में देने को कहा गया है, लेकिन जिस निगम के पास मुलाजिमों को वेतन देने के पैसे हो, उसके लिए यह पैसा निकालना भी मुश्किल होना तय है।

त्रिपड़ीपानी वाली टंकी का गोल चक्कर छोटा होगा: त्रिपड़ी में टंकी वाले गोल चक्कर को डिस्पेंसरी वाली साइड से छोटा करने का फैसला भी निगम ने लिया है। तर्क है पब्लिक को शाम को इस जगह ज्यादा आवाजाही होने से परेशानी होती है। निगम ने मौका चैक किया है और मौके पर डिस्पेंसरी वाली साइड पर दीवार केवल 7 से 8 फीट पीछे जा सकती है। इस दीवार के साथ कुछ वृक्ष लगे हुए है। अगर दीवार को पीछे करना पड़ता है तो पेड़ों को काटना पड़ेगा, जिसके लिए जंगलात विभाग की मंजूरी जरूरी है।
...इधर विरोध में मार्केट एसोसिएशन : निगम के प्रस्ताव के विरोध में रोज गार्डन मार्केट एसोसिएशन उतर आई है। एसोसिएशन प्रधान लक्की, मुकेश गुप्ता, संजय कुमार, राजिंदर कुमार, संजीव कुमार, तलविंदर लक्की ने कहा है कि मार्केट में ज्यादातर दुकानों ने एडवांस पैसा भरा है। अगर कोई दुकानदार प्रॉपर्टी खरीदने में असमर्थ है तो निगम दुकान खुली बोली में बेचे। पटियाला व्यापार बचाओ संघर्ष कमेटी के प्रधान राकेश गुप्ता, हंस राज धीमान बलवीर चंद सिंगला ने शहर के कई मार्केट एसोसिएशनों से मीटिंग करके साफ कर दिया है कि अगर कोई दुकानदार दुकान खरीद सकता है तो बेहतर है, लेकिन अगर कोई दुकानदार खुली बोली के जरिए दुकान नहीं खरीद सकता तो निगम उससे दुकान खाली कराए। उससे पहले की तरह ही किराया वसूला जाए। राकेश गुप्ता ने कहा कि निगम एकदम से खुली बोली की धमकी देकर कैसे लोगों का रोजगार छीन सकता है। कमेटी मुद्दे को लेकर संघर्ष करेगी।

कर्ज ज्यादा, इसलिए प्रॉपर्टी बेचने के लिए मजबूर निगम : निगम की वित्तीय स्थिति बुरी तरह से हिल चुकी है। कर्मचारियों का जमा होने वाला पीएफ, सीपीएफ रिवाइजड स्केल का बकाया साढ़े 4 करोड़, रिटायर्ड कर्मचारियों को ग्रेचुएटी लीव इनकेशमेंट करीब डेढ़ करोड़, ऑडिट फीस करीब 2 करोड़, डायरेक्टर चार्जेज करीब 15 लाख रु, म्यूनिसिपल भवन के लिए 32 करोड़, इलेक्शन चार्जेज के लिए 13 लाख रु, इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट से लिए गए 25 करोड़ कर्जे में से करीब 8 करोड़ 50 लाख रु देने बाकी है। इसका ब्याज अलग से है। ठेकेदारों के 80 लाख रु, लेबर सेस के 40 लाख रु पीडीए की किश्त के 11 करोड़ निगम पर कर्ज है।

मुलाजिमों को रेगुलर करने का प्रस्ताव भी शामिल: 7 महीने बाद मेयर अमरिंदर बजाज ने नगर निगम की जनरल हाउस की मीटिंग 19 सितंबर को बुलाई है। शहर की डेवलपमेंट से जुड़े 34 अहम प्रस्ताव पेश किए जाएंगे। पंजाब म्यूनिसिपल एडवरटाइजमेंट पॉलिसी 2012 के अधीन निगम द्वारा बनाए बायलाज एडाप्ट करने संबंधी, गवर्नेंस लागू करने, पंजाब मोंडल बिल्डिंग बायलाज 2010 के अंदर संशोधन संबंधी प्रस्ताव, पंजाब म्यूनिसिपल भवन चंडीगढ़ के निर्माण के लिए कंट्रीब्यूशन लेने संबंधी, निगम हद के अंदर मैरिज पैलेस सेटअप करने, मौजूदा मैरिज पैलेस नियमित करने, निगम की रेंट लीज की दुकानों, जगहों को खुली बोली के जरिए बेचने संबंधी, त्रिपड़ी में पानी वाली टंकी वाले गोल चक्कर को छोटा करने संबंधी, शहर के एरिया में कमर्शियल नक्शे पास करने संबंधी, लीला भवन टीपी स्कीम की अमेंडमेंट करने संबंधी, दो साल पूरे होने पर कर्मचारियों को रेगुलर करने का प्रस्ताव शामिल है।

-निगम को होगी 226 करोड़ की आमदनी, उधारी दूसरे मद में करीब 100 करोड़ खर्च करने हैं ।
- प्रॉपर्टी कैसे बेची जाए यह मुद्दा पेंडिंग, हाईकोर्ट के आदेश रहे हैं आड़े ।