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माहिर बोले-सूफी संगीत की संभाल और प्रचार पर होगा काम

7 वर्ष पहले
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सूफीसाहित्यकी संभाल और रिसर्च वर्क के अलावा सूफी संगीत की संभाल और प्रचार-प्रसार के लिए पुरजोर प्रयास करने की चर्चा के साथ चौथी इंटरनेशनल सूफी कॉन्फ्रेंस का समापन हुआ। पीयू के बाबा फरीद सेंटर फॉर सूफी स्टडीज द्वारा कराई गई कॉन्फ्रेंस के आखिरी दिन माहिरों ने कहा कि सूफी परंपरा पंजाबी साहित्य का कीमती सरमाया है। इसकी संभाल करनी जरूरी है। सूफीज्म भेदभाव का खंडन करके भाईचारे और एकता का संदेश देता है। इसलिए सूफी में समाए गहरे अर्थ समझते हुए दुनिया में शांति का संदेश देना चाहिए। वीसी डाॅ. जसपाल सिंह ने कहा कि इस मटीरियलिस्टिक दौर के चलते भविष्य में मनुष्य के अस्तित्व, अपने अलग अस्तित्व को लेकर लड़ाई होने की संभावना है। पर सूफीमत हमेशा सह-अस्तित्व यानि भाईचारे को प्यार मोहब्बत की जंजीरों में बांधने की बात करता है।

उन्होंने कहा कि सूफी सेंटर भविष्य में सूफी संगीत की संभाल और इसके विकास प्रसार के लिए प्रयास करेगा। बुधवार को कॉन्फ्रेंस के अलग-अलग सेशनों के प्रधानगी मंडल में अफगानिस्तान के डिप्टी हाई कमिश्नर एम अशरफ हैदरी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी प्रो. शम्सी तहरानी, मिस्र के डाॅ. एएम अब्दुल रहमान, डाॅ. गुरनाम सिंह, डाॅ. जगबीर सिंह और डाॅ. सुखदेव सिंह आदि शामिल हुए।

कॉन्फ्रेंस के पहले सेशन में डाॅ. मोहम्मद हबीब ने \\\'सूफीमत और गुरमति\\\', डाॅ. कमलप्रीत कौर ने \\\'गुरमति सूफी काव विच्च नारी\\\' और डाॅ. सिकंदर सिंह ने \\\'सुल्तान बाहू अते गुरमति काव\\\' विषयों पर रिसर्च पेपर पढ़े। डाॅ. गुरनायब सिंह ने \\\'गुरमति सूफीमत संवाद\\\', प्रो. शमशाद अली ने \\\'सूफी संगीत अते गुरमति संगीत\\\', डा. खानम खुर्शीद ने \\\'सूफी रिवायत जफरनाम\\\' विषयों पर विचार दिए।

अमीर खुसरो, बुल्ले शाह के कलाम पेश किए

मंगलवारशाम को प्रसिद्ध कव्वाल मोहम्मद अनवर और उनके साथियों ने अमीर खुसरो, शेख फरीद, बुल्ले शाह और ख्वाजा गुलाम फरीद आदि शायरों के कलाम गाकर वाहवाही लूटी। यहां डाॅ. धनवंत कौर, कॉन्फ्रेंस के डायरेक्टर प्रो. नासिर नकवी, डाॅ. जसविंदर सिंह, डाॅ. जसबीर कौर, डाॅ. निवेदिता उप्पल, डाॅ. राजवंत कौर, डाॅ. नवजोत कौर कसेल, डाॅ. गुरमीत सिंह सिद्धू, डाॅ. गुरप्रीत कौर अन्य मौजूद रहे।