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जो माल एक्सपोर्ट ही नहीं हुआ उस पर वैट रिफंड क्लेम किया

6 वर्ष पहले
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वैटरिफंड के 2 केसों में एक्साइज एंड टैक्सेशन िडपार्टमेंट को 88 लाख रुपए की चपत लगाने की कोशिश की गई। डीलर्स की तरफ से ज्यादा वेस्टेज, लेबर और जो माल एक्सपोर्ट भी नहीं हुआ है, उस पर रिफंड क्लेम किया गया है। ये दोनों फर्में लुधियाना की हैं। जांच में इसका खुलासा हुआ। डिपार्टमेंट का कहना है कि जो क्लेम वैट रिफंड के दायरे में ही नहीं है, तो उस पर किस बात का रिफंड करें। इन दो केसों के अलावा तीन और ऐसे ही केस डिपार्टमेंट के पास पहुंचे हैं। शक पर इन सभी केसों को इंक्वायरी के लिए अथॉरिटी ने नोडल अफसर के पास हैड ऑफिस भेज दिए हैं।

नोडल अफसर डीईटीसी एसएस बांगड़ ने बताया कि लुधियाना के दविंदर एक्सपोर्टर्स ने 72 लाख का रिफंड क्लेम किया है। जबकि गुड्स की वेल्यू करीब 12 करोड़ 31 लाख है। डिपार्टमेंट ने इसकी वेरिफिकेशन माल के वेट एंगल से की है। इसमें फर्म ने परचेस दिखाई है। जिसमें डाइंग मटीरियल, प्रोसेसिंग चार्जेस, वेस्टेज 48 फीसदी और आईटीसी फैक्ट्री में पड़े स्टॉक पर क्लेम किया है। जबकि डिपार्टमेंट वेस्टेज पर सिर्फ 30 फीसदी रिफंड क्लेम की मंजूरी देता है। इसमें 48 फीसदी क्लेम किया है। प्रोसेसिंग में इतना मटीरियल वेस्ट नहीं होता है। इसके अलावा रंगाई की लेबर पर भी रिफंड मांगा गया है। माल जोकि स्टॉक में पड़ा है और एक्सपोर्ट ही नहीं हुआ, उस पर भी रिफंड क्लेम किया जा रहा है। इस केस में बनता रिफंड 23 लाख 94 हजार 736 रुपए हैं और 48 लाख 34 हजार 98 रुपए रिफंड रिजेक्ट किया है।

बांगड़ के मुतािबक इसी तरह का एक और केस कपूर कोटसिन लुधियाना का है। इसमें भी करीब 72 लाख रिफंड क्लेम किया गया है। वेस्टेज 43 फीसदी दिखाई है। बाकी उसी तरह से लेबर, स्टॉक पर आईटीसी क्लेम कर रहा है। इसमें 32 लाख 28 हजार 527 रुपए का रिफंड बनता है और 39 लाख, 750 हजार रुपए रिजेक्टेड रिफंड है। ऐसे ही कई अन्य केसों में झूठे रिफंड क्लेम किए जा रहे हैं। इन सभी केसों की जांच रिपोर्ट अथॉरिटी को बनाकर भेज दी है। इनके रिफंड भी रोकने के लिए रिपोर्ट में लिखा है। बाकी फैसला अथॉरिटी लेगी। एक केस थोड़ा ठीक था, तो उसका बनता रिफंड देने के लिए लिख दिया है।

लुधियान की दो फर्मों समेत पांच ने किया गलत क्लेम, वेरिफिकेशन में पकड़े गए