पटियाला. माता कौशल्याअस्पताल में महिल और बच्चे की मौत के बाद जांच में पता चला कि अल्ट्रासाउंड करने वाला एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट इस महीने में छुट्टी काट कर 13 सितंबर को ड्यूटी पर आया था। अब फिर से 16 से 26 सितंबर तक छुट्टी पर है। अस्पताल में मरीजों के अल्ट्रासाउंड या तो राजिंदरा में होते है या मरीजों को मजबूरन प्राइवेट सेंटरों पर जाना पड़ता है।
आरती की तरह अगर किसी मरीज की इमरजेंसी कंडीशन है तो डॉक्टर उसका यूजर चार्जेज स्कीम के तहत साथ लगते किसी प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटर से अल्ट्रासाउंड कराते हैं। सेहत महकमे ने इस संबंध में सभी सरकारी डॉक्टरों को पहले लिखित आदेश जारी किया है। इसके बावजूद हालात खराब होने पर आरती को राजिंदरा भेजा गया।
प्राइवेट सेंटर से उसका अल्ट्रासाउंड क्यों नहीं कराया
जब अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने वाला नहीं था और मरीज की हालत खराब थी तो डॉक्टरों ने यूजर चार्जेज के जरिए तुरंत साथ के किसी प्राइवेट सेंटर से उसका अल्ट्रासाउंड क्यों नहीं कराया?
मुझे बेहद अफसोस है कि एक महिला और उसके बच्चे की मौत सिर्फ इसलिए हो गई कि समय पर उसे सुविधा नहीं मिल पाई। मैं मामले की जांच कराउंगा। अगर किसी स्तर पर कोई लापरवाही हुई है तो सरकार सख्त एक्शन लेगी। - सुरजीतज्याणी, सेहतमंत्री।
खबर सुनते ही पटियाला व्यापार बचाओ संघर्ष कमेटी प्रधान राकेश गुप्ता कारोबारियों के साथ अस्पताल पहुंच गए। राकेश गुप्ता ने कहा कि रेडियोलॉजिस्ट कहीं प्राइवेट सेंटरों को फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझ कर तो छुट्टी पर नहीं रहता है? डा. रेणु अग्रवाल के अलावा डा. सोढ़ी, डा. राजेश मोहन समेत अन्य डाक्टर मीडिया के सामने सफाई देते रहे कि आरती उसके बच्चे की नेचुरल डेथ है। थाना चार नंबर डिवीजन के इंचार्ज जानपाल सिंह ने मौके पर पीड़ितों के बयान दर्ज कर लिए थे। उन्होंने कहा जांच जारी है।
शेड्यूल बनाते वक्त मिली सूचना
एमएसके छुट्टी पर होने पर हम सुबह शेड्यूल बना रहे थे। 9 बजे के बाद हमें पता चला कि आरती नाम की मरीज की हालत खराब है। मैं फौरन मौके पर पहुंची। डिलीवरी होेने पर बच्चा मरा मिला। उस समय भी बच्चे की मां की हालत खराब थी।