--Advertisement--

IFA की अनसुनी कहानी, जानिए 11 तस्वीरों की जुबानी!

'इंडियन एयर फोर्स' के विमानों के इतिहास से लेकर आज तक के सफर पर एक नजर...

Danik Bhaskar | Oct 02, 2013, 07:25 PM IST

भोपाल. भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को ब्रिटिस शासन काल में की गई थी, तब इसे 'रॉयल इंडियन एयर फोर्स' कहा जाता था। आजादी के बाद रॉयल शब्द को हटा दिया गया और आज का 'इंडियन एयर फोर्स' नाम इस्तेमाल किेया जाने लगा।

ब्रिटिस शासन ने शुरुआत में वायुसेना का इस्तेमाल अपने महत्वपूर्ण बंदरगाहों की रक्षा के लिए किया। चेन्नई, मुंबई, कोलकाता, कराची और कोचीन में वायुसेना के केंद्र बनाए गए। आजादी के बाद भारत की सुरक्षा जरुरतें बदल गईं। पाकिस्तान और चीन से संभावित खतरे को ध्यान में रखकर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में वायुसेना के महत्वपूर्ण अड्डे बनाए गए। इसका फायदा 1965 की जंग में दिखा, जब पठानकोट से उड़ान भरने वाले 31 स्क्वाड्रन के विमान पाकिस्तानी सेना पर कहर बनकर टूट पड़े थे।

युद्ध में वायु सेना की ताकत जीत और हार का फैसला करती है। जंग में विमानों का इस्तेमाल प्रथम विश्वयुद्ध से शुरू हुआ था। उस समय लड़ाकू विमानों में उड़ते सैनिक दुश्मन पर अपने हाथों से बम गिराते थे और विमान भी लकड़ी के बने होते थे। भारतीय वायु सेना भी विकास की इसी दौर से गुजरी है।

नोट- आने वाले 8 अक्टूबर को 'इंडियन एयर फोर्स डे' है। यह वायुसेना के जवानों की बहादुरी और शौर्य को याद करने का दिन है। इसे ध्यान में रखते हुए पेश है भारतीय वायुसेना पर एक खास सीरीज।

आगे की स्लाइड में नजर डालते हैं, 'इंडियन एयर फोर्स' के विमानों के इतिहास से लेकर आज तक के सफर पर

लोकल की अन्य ख़बरें पढ़ने के लिए क्लिक करें...

WAPITI WAPITI

हवा में उड़ते थे लकड़ी के जहाज और हांथ से फेंकते थे बम

आज के आवाज से भी तेज गति से उड़ने वाले लड़ाकू विमानों की शुरुआत लकड़ी से बने दो पंखों वाले विमानों से हुई थी। भारतीय वायुसेना में सबसे पहले शामिल होने वाले विमान का नाम WAPITI था। लकड़ी के दो पंखों से बने इस विमान में धातु के प्रोपेलर लगे थे। इसे ताकत नौ सिलेंडर वाले 460 हॉर्स पावर के जुपिटर VIII इंजन से मिलती थी।

दुश्मनों पर हमला बोलने के लिए इसमें Mk II 0.303 एयर कूल्ड मशीन गन लगे थे। गोली चलाने वाले सैनिक (गनर) की सीट पायलट के पीछे होती थी और लड़ाई के दौड़ान वह दूसरे विमानों पर मशीनगन से गोलियों की बौछार करता था। जमीन पर लड़ रहे सैनिकों पर वे आसमान से गोलियां बरसाते या फिर हथगोले फेंकते थे।

 

लोकल की अन्य ख़बरें पढ़ने के लिए क्लिक करें...
 
Hawker Hurricane Hawker Hurricane

रॉयल इंडियन एयर फोर्स में शामिल होने वाला दूसरा लड़ाकू विमान हॉकर हरिकेन (Hawker Hurricane) था। तकनीकी रूप से यह WAPITI से काफी एडवांस था। दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटेन की तरफ से सबसे अधिक इसी विमान का इस्तेमाल किया गया था। एक सीट वाला यह विमान धातू का बना था और भारी मशीनगन और 4 x 20 mm के तोप इसके पंखों पर लगाए गए थे। रॉयल इंडियन एयर फोर्स ने इस विमान का इस्तेमाल वर्मा की लड़ाई में किया था। इसे सुपरमरीन स्पिटफायर भी कहा जाता था।

 

लोकल की अन्य ख़बरें पढ़ने के लिए क्लिक करें...
 
C-47 C-47

C-47 डकोटा भारतीय वायुसेना का महत्वपूर्ण जहाज था। इसका इस्तेमाल सैनिक और साजो-सामान को ढोने के लिए किया जाता था। आजादी से पहले वायुसेना में शामिल किए गए इस विमान ने विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर को बचाने में अहम किरदार निभाया था। ऊंचे पहाड़ी इलाके में सैनिकों और गोला-बारुद को जल्द से जल्द पहुंचाने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया था।

 

लोकल की अन्य ख़बरें पढ़ने के लिए क्लिक करें...
 

दूसरे विश्व युद्ध में लड़ाकू और बम वर्षक विमानों का खूब इस्तेमाल किया गया। जर्मनी और जापान के लड़ाकू विमान अमेरिका और ब्रिटेन के विमानों पर भारी पड़ रहे थे। इसी समय अमेरिका ने अपना बम वर्षक विमान B-24 जंग में उतारा। अपने चार शक्तिशाली इंजनों की बदौलत यह भारी गोला-बारुद लेकर उड़ान भर सकता था और दुश्मनों पर बमों की बारिश कर देता था। आजादी से पहले भारतीय सेना में भी इसे शामिल किया गया।

 

लोकल की अन्य ख़बरें पढ़ने के लिए क्लिक करें...
 

वैम्पायर F3 और FB52

वैम्पायर एशिया के पहले जेट विमान थे। इसने चीन से साथ 1962 में लड़े गए जंग में महत्वपूर्ण रोल निभाय था। वैम्पायर शुरू में एक सीट वाले विमान थे, बाद में इसका विकसित रूप FB 52 आया, जिसमें दो लोग बैठ सकते थे। दो सिटों वाले विमान का अधिकतर इस्तेमाल पायलटों को ट्रेनिंग देने में किया गया।

 

लोकल की अन्य ख़बरें पढ़ने के लिए क्लिक करें...
 

भारत-चीन युद्ध में अपनी ताकत का लोहा मनवाने वाले लड़ाकू विमान तूफानी (Dassault Ouragan) को फ्रांस ने बनाया था। यह फ्रांस द्वारा डिजाइन किया गया पहला जेट फाइटर बॉमर था। हिमालय की तंग घाटियों में उड़ान भरकर इसने अपनी काबिलियत साबित की थी।

 

लोकल की अन्य ख़बरें पढ़ने के लिए क्लिक करें...
 

हॉकर हंटर F 56, F56a,

भारतीय वायुसेना इस विमान का इस्तेमाल पायलटों को ट्रेनिंग देने में करती है। दुनिया भर में जेंटलमैंस एयरक्राफ्ट के रूप में पहचाने जाने वाले इस विमान ने 45 सालों तक अपनी सेवाएं दी हैं।

 

लोकल की अन्य ख़बरें पढ़ने के लिए क्लिक करें...
 

अपने नाम की तरह ही जगुआर एक विनाशक विमान है। 1350 किलोमीटर प्रतिघंटे की अधिकतम रफ्तार वाला यह विमान अपने साथ 4750 किलोग्राम बम और इंधन लेकर ऊड़ान भर सकता है। दो इंजन और एक सीट वाले इस विमान में 300 mm के गन भी मौजूद होते हैं।

 

लोकल की अन्य ख़बरें पढ़ने के लिए क्लिक करें...
 

मिग- 21

भारतीय वायुसेना उच्च तकनीक वाले लड़ाकू विमानों के लिए मुख्य रूप से रूस पर निर्भर करती है। रूस द्वारा बनाया गया MIG- 21 अपने समय के सबसे एड्वांस विमानों में गिना जाता था। यह लंबे समय तक भारतीय वायुसेना के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह महत्वपूर्ण रहा है।

हवा में दूसरे विमानों को नष्ट करना हो या जमीन पर मौजूद दुश्मनों को खत्म करना हो, यह विमान हर काम करने में माहिर है। एक इंजन और एक सीट वाले मिग-21 की अधिकतम रफ्तार 2230 किलोमीटर प्रति घंटे है। इसमें एक 23 mm  का तोप और चार आर-60 मिसाइल लगे हैं।  
 

 

लोकल की अन्य ख़बरें पढ़ने के लिए क्लिक करें...
 

मिग-23 एमएफ

इस विमान में भी एक इंजन और एक सीट है, लेकिन यह अपने पंखों के खास बनावट के कारण हवा में विशेष करतब दिखान में माहिर है। 2446 किलोमिटर प्रति घंटे की रफ्तार के साथ यह आकाश में होने वाली लड़ाइयों में बेहद खतरनाक हो जाता है। मिग-23 की तरह इसमें भी 23 mm के तोप लगे हैं। इसके साथ ही इसमें R-23R/T मध्यम दूरी तक मार करने वाले और R-60 नजदीकी लड़ाई में इस्तेमाल होने वाले मिसाइल लगे हैं।

इस श्रृंखला में आगे पढ़िए, वर्तमान में किन विमानों का इस्तेमाल करती है वायुसेना

 

लोकल की अन्य ख़बरें पढ़ने के लिए क्लिक करें...