बलाचौर (नवांशहर). आबूधाबी की अलबत्ता जेल में तीन माह से शकी तौर पर हत्या केस में गिरफ्तार किए गए 16 पंजाबी नौजवानों की वतन वापसी को लेकर उनके पारिवारिक सदस्य बेहद चिंतित हैं। इनमें से तीन लड़के बलाचौर तहसील के रहने वाले हैं, जबकि परिवार वालों को उनके जेल में होने का जब से पता चला है वे तभी से उनको जेल से बाहर लाने के लिए दर-दर की गुहार लगा रहे हैं।
विदेश मंत्री परनीत कौर, राज्यसभा सदस्य अविनाश राय खन्ना के पास गुहार लगाने के बाद भी अभी तक उन्हें उम्मीद की कोई किरन दिखाई नहीं देती, जबकि जेल से भी उनकी कोई खबर नहीं आ रही। गरीब परिवारों से संबंधित ये नौजवान परिवार की दशा सुधारने का सपना लेकर विदेश गए थे। अब परिवार के सामने दो बड़ी मुश्किलें खड़ी हैं, एक तो विदेश में अपने बेटों को जेल से छुड़वाने की और दूसरी यदि वे वापस वतन लौट आते हैं, तो कर्ज को कैसे उतारेंगे।
लखविंदर सिंह अलफरां कंपनी में करता था काम
गांव गरले बेट के रहने वाले मदन लाल ने बताया कि 26 वर्षीय लखविंदर सिंह को आबूधाबी गए हुए करीब पांच वर्ष हो चुके हैं और वह अलफरा कंपनी में काम करता था, इस दौरान वह सिर्फ एक बार भारत आया था। करीब एक माह पहले जेल में उनके बेटे ने उन्हें बताया कि दीवाली वाले दिन एक पाकिस्तानी के कत्ल के केस में शक के आधार पर उसे कमरे से पुलिस ने उठा लिया। करीब तीन माह से वह जेल में बंद है।
माता राज कुमारी ने कहा कि एक बार मेरा लड़का पंजाब आ जाए, दोबारा वह किसी भी कीमत पर उसे विदेश नहीं जाने देगी। उसे विदेश भेजने के लिए रिश्तेदारों व ब्याज पर पैसे लिए थे, जो वे आज तक वापस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके दो लड़के व दो लड़कियां हैं। लखविंदर भाई-बहनों में से सबसे बड़ा है, इसलिए घर की दशा सुधारने के लिए विदेश चला गया। उन्हें क्या पता था कि उनके जिगर का टुकड़ा जेल में बंद हो जाएगा।
कर्ज लेकर भेजा था आबूधाबी
गांव गढ़ी राय के गुरपाल सिंह ने बताया कि उसने अपने बेटे केसर सिंह को कर्ज लेकर 4 वर्ष पहले आबूधाबी में भेजा था। यहां पर उसे कोई अच्छा काम नहीं मिल रहा था, इसलिए करीब सवा लाख रुपए कर्ज लेकर लड़के को विदेश भेज दिया।
फोन तक नहीं करने देती पुलिस
गांव मोहर के रहने वाले मनजीत सिंह ने बताया कि उसके 25 वर्षीय बेटे अमरजीत सिंह को आबूधाबी गए करीब पांच वर्ष का समय हो गया है। उसके दो लड़के और हैं, जो भी दुबई में ही हैं। उसके लड़के ने फोन पर बताया था कि अदालत ने सुनवाई के लिए 27 फरवरी दी है और यहां की पुलिस ने उन्हें दीवाली वाले दिन उनके साथ लगते क्षेत्र में झगड़े में एक पाकिस्तानी की मौत हो गई थी, इस कारण उन्हें कमरों से उठाकर ले गए और एक माह तक पुलिस ने उन्हें फोन तक नहीं करने दिया।