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तुलसी पूजन की नित्य विधि

Dainik Bhaskar

Jan 24, 2015, 11:23 AM IST

सम्पन्नता को बढ़ाने वाली देवी तुलसी का शास्त्रों में बहुत अधिक महत्तव बताया गया है। घर में तुलसी का होना। तुलसी का सम्मान किया जाना। दुर्भाग्य का दूर कर सौभाग्य को बढ़ाने वाला होता है। तुलसी का सबसे प्रमुख गुण है -शुद्धता। तुलसी अपने आस-पास के वातावरण को शुद्ध बनाती है। जिससे कि तुलसी के आसपास सकारात्मक ऊर्जा अधिक मात्रा में पाई जाती है। यही कारण है कि घर में तुलसी के रहने से घर के वास्तु पर शुभ प्रभाव पड़ता है। शास्त्रों में तुलसी को देवी लक्ष्मी का रुप कहा गया है। तुलसी पूजन करने से देवी लक्ष्मी की प्रसन्नता प्राप्त होती है। तुलसी का रोज जल से सिंचन करना व दीप अर्पित करना जीवन में प्रसन्नता लाता है। समृद्धि बढ़ाता है। घर में तुलसी माता का पूजन किस तरह किया जाना चाहिए, जानते हैं इसी बारे में.....

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तुलसी पूजन की विधि

सम्पन्नता को बढ़ाने वाली देवी तुलसी का शास्त्रों में बहुत अधिक महत्तव बताया गया है। घर में तुलसी का होना। तुलसी का सम्मान किया जाना। दुर्भाग्य का दूर कर सौभाग्य को बढ़ाने वाला होता है। तुलसी का सबसे प्रमुख गुण है -शुद्धता। तुलसी अपने आस-पास के वातावरण को शुद्ध बनाती है। जिससे कि तुलसी के आसपास सकारात्मक ऊर्जा अधिक मात्रा में पाई जाती है। यही कारण है कि घर में तुलसी के रहने से घर के वास्तु पर शुभ प्रभाव पड़ता है।

शास्त्रों में तुलसी को देवी लक्ष्मी का रुप कहा गया है। तुलसी पूजन करने से देवी लक्ष्मी की प्रसन्नता प्राप्त होती है। तुलसी का रोज जल से सिंचन करना व दीप अर्पित करना जीवन में प्रसन्नता लाता है। समृद्धि बढ़ाता है। घर में तुलसी माता का पूजन किस तरह किया जाना चाहिए, जानते हैं इसी बारे में.....


तुलसी पूजन की नित्य विधि

जिस प्रकार से घरों में पूजा स्थान की पवित्रता का ध्यान रखा जाता है। उसी प्रकार से तुलसी के पौधे के आसपास स्वच्छता और पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए। शास्त्रों में शुक्रवार और रविवार को और सप्तमी तिथि को तुलसी को छूने की मनाहीं की गई है। इसलिए इन तिथि व दिनों में तुलसी पूजन नहीं करें। तुलसी पूजन में सबसे पहले तुलसी को जल से सींचे। तुलसी को हल्दी अर्पित करें। दूध व दही अर्पित करें। तुलसी को दीप समर्पित करें। आरती करें। सुख व समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना देवी तुलसी से करें। तुलसी नामाष्टक का पाठ करें।

तुलसी नामाष्टक मंत्र -
वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
यः पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।

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