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अर्थ नहीं, परमार्थ से होगा कल्याण

7 वर्ष पहले
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मुनिपायसागर महाराज ने गुरुवार को आयोजित धर्म सभा में कहा कि कल्याण के लिए अर्थ की बजाय परमार्थ पर ध्यान देना जरूरी है।

निर्वाह की जगह निर्वाण यानी मोक्ष की कामना करो। सृष्टि बदलने का प्रयास करने की जगह दृष्टि बदलो। उन्होंने कहा कि सतयुग में भी विरोध के कारण संघर्ष हुए हैं, मगर कलयुग में परमार्थ की बजाय पदार्थ के लिए विरोध लड़ाई झगड़ों में तबदील हो रहे हैं। धर्म के नाम पर नफरत की दीवार खड़ी करने के प्रयास निंदनीय हैं।

मुनिश्री ने कहा कि वर्तमान में होने वाले झगड़े धर्म की बजाय धन तथा सत्य की जगह सत्ता के कारण हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि घर-मोहल्ला, नगर और देश एक करने वालों की जरूरत है। इन्हें बांटने के कर्म व्यर्थ हैं। वर्षायोग समिति के प्रचार मंत्री ललित जैन ने बताया कि छतरियों के मंदिर में 1 से 7 अक्टूबर तक विधान कार्यक्रम मुनि श्री के सानिध्य में आयोजित होगा। 8 अक्टूबर को आचार्य विद्या सागर का जन्म महोत्सव तथा पायसागर महाराज का दीक्षा जयंती समारोह आयोजित किया जाएगा।