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एकीकरण के चक्कर में गड़बड़ाई शिक्षा व्यवस्था

7 वर्ष पहले
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अजमेर. शिक्षा विभाग में विद्यालय एकीकरण को लेकर जारी कवायद लंबी होती जा रही है। एेसी स्थिति में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर के विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरती नजर रही है। इस कारण अब बड़ी कक्षाओं की अध्ययन-अध्यापन व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
राज्य सरकार ने एक और आदेश जारी कर जिला कलेक्टर एवं शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संबंधित क्षेत्र के विधायक की अनुशंसा प्राप्त कर प्रस्ताव तैयार किए जाएं। इन प्रस्तावों के आधार पर ही एकीकरण से मुक्त करने के लिए विद्यालयों की सूची भेजी जाए। विधायक अब टिप्पणी सहित प्रस्ताव कलेक्टर को देंगे, जिसके बाद संबंधित विद्यालय एकीकरण से मुक्त हो सकेंगे।

राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी एकीकरण योजना के तहत 14 अगस्त को राज्य के 17 हजार 129 विद्यालयों के एकीकरण के आदेश जारी करते हुए शिक्षा में गुणवत्ता एवं गुणात्मक सुधार करने के दावे किए गए थे। आदेश जारी होने के बाद एक माह से अधिक का समय बीतने के बाद भी एकीकरण में समन्वित हुए विद्यालयों एवं अध्ययनरत विद्यार्थियों की संख्या सूचना शिक्षा विभाग के पास नहीं है।

विरोध विसंगतियां

एकीकरण आदेश जारी होते ही विसंगतियों का विरोध शुरू हो गया। इसके बावजूद विभाग की सख्ती के चलते प्रशासनिक रूप से विद्यालयों का एकीकरण हो गया। कई जगह स्कूलों के ताले लगा दिए गए। जनआंदोलन को देखते हुए सरकार ने जिला कलेक्टरों के माध्यम से आपत्तियां मांगी, लेकिन संबंधित पक्षों को नीति नियम उपलब्ध नहीं करवाए गए। इस दौरान विधानसभा में भी एकीकरण का विरोध गूंजता रहा।

प्रस्ताव तैयार कर भेज दिए हैं

विधायक अनिता भदेल ने बताया कि क्षेत्र में ऐसे करीब 10 विद्यालय हैं, जहां पर बैठने के लिए जगह की समस्या थी। प्रस्ताव तैयार कर भेज दिए गए हैं। जिन विद्यालयों में स्वयं का भवन है और बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान है, उनके बारे में सुझाव दिए गए हैं।

इधर विद्यार्थी नदारद, उधर पेड़ के नीचे पढ़ाई

वर्तमान में हकीकत यह है कि समन्वित हुए कई विद्यालयों में छात्र-छात्राएं अपनी उपस्थिति के बराबर दर्ज करवा रहे हैं। एकीकरण कार्यक्रम के तहत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पलटन बाजार को सीआरपीएफ विद्यालय में मर्ज किया गया है।