इन उद्योगों पर लागू होनी थी
झूठा ही सही, असर यह हुआ
सरकारकी अधिसूचना जारी होने के बाद 1 जनवरी 14 से संवेदकों ने जहां राजकीय संस्थानों में नई दरों पर श्रमिक उपलब्ध कराना शुरू किया, वहीं निजी उद्योगों में प्लेसमेंट नई दरों के आधार पर होने लगा। संवेदक ही नहीं, राजकीय संस्थानों ने भी संवेदकों से नई दरों पर ही श्रमिक की मांग करने लगे। करीब नौ माह से निजी उद्योगों के साथ राजकीय संस्थानों में संवेदकों के माध्यम से लगे श्रमिकों को बढ़ी दरों से भुगतान हो रहा है, जबकि कुछ संस्थान फिलहाल पुरानी न्यूनतम मजदूरी दर से ही भुगतान कर रह
इन उद्योगों पर लागू होनी थी
यूं छले गए मजदूर... जानिए पूरी कहानी
दो करोड़ मजदूरों के साथ चुनावी ठगी
कांग्रेसतथा भाजपा दोनों ही राजनीतिक पार्टियों के चुनावी वादों पर भरोसा कर न्यूनतम मजदूरी बढ़ने की आस लगा बैठे करीब दो करोड़ दिहाड़ी मजदूरों को इस चुनावी वादे की हकीकत से रूबरू होने के लिए दिल पर पत्थर रखना पड़ेगा। बुरी खबर यह है कि पूर्व कांग्रेस के कार्यकाल में शुरू हुई प्रक्रिया के तहत जिन मजदूरों को बढ़ी हुई दरों से भुगतान कर भी दिया गया था, उनसे भी दी गई राशि की पुनर्वसूली की कवायद शुरू हो गई है। दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा भाजपा सरकार ने भी लोकसभा चुनाव के दौरान न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव विचाराधीन बताया था।
राज्य में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने गत वर्ष 30 सितंबर को अधिसूचना जारी कर राजकीय संस्थानों में प्लेसमेंट करने वाली संवेदक फर्मों तथा पचास से अधिक श्रेणी के औद्योगिक संस्थानों में काम करने वाले विभिन्न दो सौ से अधिक वर्ग के श्रमिकों की मजदूरी में इजाफा करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी क्रम में बाकायदा 3 अक्टूबर 13 को सरकारी प्रिंटिंग प्रेस से राजपत्र विशेषांक जारी किया गया। जिसमें अकुशल श्रमिकों की मजदूरी 189 प्रतिदिन, अर्द्ध कुशल श्रमिकों की 199 प्रतिदिन, कुशल की 209 प्रतिदिन तथा उच्च कुशल श्रमिक की मजदूरी 259 प्रतिदिन करना प्रस्तावित कर आपत्तियां सुझाव आमंत्रित कर लिए गए। इसमें यह भी साफ कहा गया कि ये प्रस्तावित दरें 1 जनवरी 14 से लागू होंगी।
सोप स्टोन फैक्ट्रीज, कॉटन जिनिंग तथा प्रेसिंग फैक्ट्रीज, ऑटोमोबाइल वर्कशॉप, कॉटन डाइंग, प्रिंटिंग तथा वाशिंग फैक्ट्रीज, स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज, गोटा किनारी एवं लप्पा संस्थानों में नियोजन, वूलन स्पिनिंग एवं विविंग फैक्ट्रीज, पावरलूम फैक्ट्रीज, प्रिंटिंग प्रेस, सिनेमा इंडस्ट्रीज, तेल मिल, इंजी. इंडस्ट्रीज, वूल क्लिनिंग एवं प्रेसिंग फैक्ट्रीज, हैंडलूम उद्योग, मैकेनिकल शक्ति के बगैर चलने वाले शुगर पान के नियोजन, दुकान एवं वाणिज्यिक संस्थान, कॉटन वेस्ट स्पिनिंग फैक्ट्रीज, किसी प्राधिकारी के अधीन नियोजन, अभ्रक कर्मांत में नियोजन, चावल मिल, आटा मिल, दाल मिल में नियोजन, सड़कों के संनिर्माण या अनुरक्षण या निर्माण संक्रियाओं में नियोजन, सरकारी कार्यालयों में कंटेनजेंसी एंड वर्क्स, विद्युत उत्पादन, वितरण तथा