अजमेर. ग्रामीण क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से चरमराती नजर रही है। हालात यह हैं कि सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक तिहाई चिकित्सा एवं दो तिहाई नर्सिंग कर्मियों के पद रिक्त हैं। कई जगह हालात यह हैं कि विशेषज्ञ चिकित्सक ही नहीं हैं। जो चिकित्सक हैं, वह भी मरीजों का उपचार करने के बजाए उन्हें रेफर कर रहे हैं। इस वजह से जेएलएन अस्पताल पर मरीजों का अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
ग्रामीण सेवा के तहत वरिष्ठ विशेषज्ञ के 6 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 5 पद रिक्त हैं। कनिष्ठ विशेषज्ञों के 85 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 46 रिक्त हैं। इसी प्रकार ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी चिकित्सा अधिकारी के 137 पदों की तुलना में 45 पद रिक्त हैं। कई सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक नहीं होने से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेडियोग्राफर नहीं होने से एक्स-रे और सोनोग्राफी भी नहीं हो पा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में नर्सिंगकर्मियों की कमी : वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों के हालात चौंकाने वाले हैं। कई सीएचसी एवं पीएचसी में तो नर्सिंग स्टाफ ही नहीं हैं। ऐसे में वहां मौजूद डॉक्टर भी मरीज को भर्ती करने के बजाय रेफर कर देते हैं।
दवा काउंटर भी संभाल रहे नर्सिंग कर्मी : जिले में फार्मासिस्ट के 65 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 17 ही काम कर रहे हैं। अधिकतर सीएचसी एवं पीएचसी पर फार्मासिस्ट ही नहीं हैं। ऐसे में नर्सिंग कर्मियों को ही दवा वितरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक ओर जहां नर्सिंग कर्मियों की कमी है, वहीं दूसरी ओर जो काम कर रहे हैं, उन पर काम की दोहरी मार पड़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों एवं नर्सिंग कर्मियों की कमी से जेएलएन अस्पताल पर मरीजों का अतिरिक्त भार पड़ रहा है।