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कांग्रेस की ग्रामीण जड़ें भी उखड़ी

6 वर्ष पहले
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इसपंचायतीराज चुनाव में कांग्रेस की ग्रामीण जड़ें पूरी तरह उखड़ गई। जिले की सभी पंचायत समितियों के प्रधान और उप प्रधान तथा जिला परिषद के प्रमुख और उप प्रमुख के पद भाजपा के कब्जे में चले गए। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट का संसदीय क्षेत्र रहा है अजमेर। उनके क्षेत्र में कांग्रेस ने आजादी के बाद अब तक की सबसे करारी मात झेली है।

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि कांग्रेस संगठन विधानसभा और लोकसभा चुनावों की हार के सदमे से उबरा ही नहीं है। दिग्गज नेता कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने भी नहीं रहे हैं। सदमे के हालात लंबे चले तो तय है कि कांग्रेस को फिर से जड़े जमाने में कई साल लग जाएंगे। भाजपा को अब तक शहरी क्षेत्र की पार्टी ही माना जाता रहा है। इस चुनाव से पहले तक कांग्रेस का जनाधार गांवों में बना हुआ था। अधिकांश पंचायतीराज संस्थाओं पर उसका कब्जा था। अजमेर में 8 में से 5 पंचायत समितियों में कांग्रेस के प्रधान थे। एक प्रधान भाजपा में चला गया तो मामला बराबर का हो गया। लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस चारों खाने चित हो गई। उसका अब एक भी जनप्रतिनिधि ग्रामीण सरकार में प्रभावी भूमिका में नहीं रह गया है। सभी 9 विधानसभा सीटों पर उसका सफाया पहले ही हो गया था। उप चुनाव में बड़ी मुश्किल से वह नसीराबाद सीट पर काबिज हो पाई थी। इसके पीछे भी भाजपा का गलत टिकट वितरण माना गया। इस चुनाव में मिली विजय से यह साबित हो गया कि भाजपा ने गांव में अपना जनाधार मजबूती से बढ़ा लिया है। गांव की सरकार अगले लोकसभा विधानसभा चुनाव तक कायम रहेगी। जाहिर है गांवों में कांग्रेस को कड़ी चुनौती मिलेगी।

> सांसद नहीं

> सिर्फ एक विधायक

> संगठन मृत प्राय:

> सत्ता से बाहर

> पायलट का संसदीय क्षेत्र लेकिन उनकी उदासीनता बरकरार

> गलत टिकट वितरण

> पर्यवेक्षक ही टिकट वितरण के बाद उदासीन

> आपसी गुटबाजी

> विधानसभा लोकसभा चुनाव की हार से उबरे ही नहीं

> कार्यकर्ताओं और नेताओं में नैराश्य का भाव