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ईश्वर की आराधना संसार में सबसे बड़ा सुख : संत उत्तमराम शास्त्री

7 वर्ष पहले
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अजमेर| सांसारिकजगत में सुख पाने की कई वस्तुओं और कई उपाय हैं परंतु मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ा सुख है आत्मिक सुख। आत्मिक सुख मनुष्य को ईश्वर की आराधना से प्राप्त होता है। उक्त वाक्य राणीसती धाम में आयोजित चातुर्मास समापन समारोह के दौरान रामस्नेही संप्रदाय मेड़ता देवल के संत उत्तमराम शास्त्री ने कहे।

महाराज ने कहा कि भगत नरसी को भगवान पर विश्वास था कि उनकी दोहिती की शादी में भात करने के लिए सांवरिया स्वयं उपस्थित होंगे। उन्होंने बिना की लालच के सद‌्भाव पूर्वक निष्ठा से ईश्वर की आराधना की थी। सच्ची सेवा क्रियात्मक नहीं, भावनात्मक भी होनी चाहिए। वंदन करने से मनुष्य का अभिमान जाता है और विरोध नष्ट होता है। मानव का हृदय सरल होता है और सरल हृदय में सांवरिया विराजते हैं। महाराज ने आज के युग पर कटाक्ष करते हुए कहा कि समय बड़ा खराब है। लोग देह की पूजा करते हैं, देव की नहीं। सच्चे भक्त वही हैं जो देव की पूजा करते हैं। चतुर्मास के समापन पर महाराज ने कहा कि खाने पीने, घूमने-फिरने, मौज और मस्ती ये जीवन के अंग हैं। परंतु सांसारिक जगत में सब कुछ तेरा मेरा और मेरा उसका, उनका आदि कहीं कहीं किसी किसी रूप में अग्रणी रहते हैं। इन सब से ऊपर है अध्यात्म, जिससे मिलती है शांति, शक्ति, प्रेम, स्नेह, दया, करुणा, साहस, भक्ति। ये सांसारिक जगत से ऊपर उठाती है। जिससे मनुष्य को सुख का अनुभव होता है। समापन समारोह के दौरान महाराज ने सभी श्रद्धालुओं से राम-नाम की महिमा और ईश्वर के प्रति भक्ति के प्रेरित किया। इस दौरान मंदिर समिति की और से चातुर्मास सत्संग के दौरान सेवा देने वाले सदस्यों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। ओम प्रकाश बंसल और शारदा देवी दाधीच ने महाराजश्री का माल्यार्पण कर स्वागत किया।

संत उत्तमराम शास्त्री।

राणीसती धाम में चातुर्मास समापन पर उपस्थित श्रद्धालु।