नियमन की दो हजार फाइलें निरस्त
अजमेर विकास प्राधिकरण
एक हजार फाइलों में खामियां होने पर आवेदकों से मांगे दस्तावेज
नियमों में नहीं आने वाली फाइलों काे निरस्त कर दिया गया है। कुछ फाइलों में खामियां थी, उनमें आवेदक से दस्तावेज मांगे गए हैं। -कृष्णकुमार त्रिवेदी, उपसचिव, एडीए
इस वजह से निरस्त हुईं फाइलें
कारणफाइलों की संख्या
ले-आउटस्वीकृत नहीं 1000
90बी की कार्रवाई नहीं होने से 500
1999के बाद सरकारी भूमि पर कब्जा 400
एसडीएमसे पुराने आवेदन में आए 100
दो साल बाद ऐसी कार्रवाई क्यों |एडीए केफैसले से सवाल यह उठता है कि आवेदकों को दो साल बाद फाइलें निरस्त होने की जानकारी क्यों दी जा रही है। आवेदकों का कहना है कि हजारों रुपए खर्च कर फाइलें लगाई थी। खामी थी तो फाइलें जमा ही नहीं करनी चाहिए थी। अब दो साल बाद जाकर फाइलें निरस्त होने की जानकारी दी जा रही है। ऐसे में नियमन की उम्मीद में जिन आवेदकों ने निर्माण करा लिया है, उनका क्या होगा।
पांच हजार फाइलों को माना नियमन योग्य | एडीएनिरस्त करने के साथ ही नियमन योग्य फाइलों का निस्तारण भी करेगा। शेष सात हजार फाइलों में से दो हजार फाइलों का निस्तारण हो चुका है, जबकि पांच हजार फाइलों काे नियमन योग्य पाया है। स्टाफ सीमित होने की वजह से फाइलों के निस्तारण में समय लगेगा। कई फाइलों पर अभी तक मौका जांच तक नहीं हुई है।
एडीए ने पांच हजार फाइलों की छंटनी कर ली है और शीघ्र ही आवेदकों को निरस्त करने की सूचना देने के लिए पत्र लिखेगा। लंबित फाइलें नियमों के तहत नहीं आने की वजह से खारिज की गई हैं। इसमें कई आवेदकों ने ऐसी रजिस्ट्रियां पेश की हैं, जिसमें खसरा नंबर ही नहीं हैं। मौका जांच में सामने आया कि कई खातेदार कागजों में अन्य की खातेदारी भूमि पर बसे हुए हैं, जबकि आवेदक ने उस खातेदार से जमीन ही नहीं खरीदी है। इसके चलते इनका नियमन होना संभव नहीं है। कई क्षेत्रों में पीटी सर्वे अथवा ले-आउट प्लान ही स्वीकृत नहीं है।
सरकारके अजमेर आने को लेकर एडीए सतर्क
इसवर्ष वसुंधरा सरकार का अजमेर में कार्यक्रम संभावित है। इस दौरान पूरा मंत्रिमंडल अजमेर में रहेगा। इसे देखते हुए एडीए किसी भी प्रकार की शिकायत का मौका नहीं रखना चाहता। यही वजह है कि एडीए ने फाइलों के शीघ्र निस्तारण करने का फैसला किया था।
कई ऐसी रजिस्ट्रियां, जिनमें खसरा नंबर ही नहीं
अरविंद गर्ग| अजमेर