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संगति के अनुसार संवरते हैं संस्कार

7 वर्ष पहले
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पार्श्वनाथदिगंबर जैसवाल जैन मन्दिर केसरगंज में ऐलाचार्य वसुनन्दी महाराज ने धर्म सभा में कहा कि कितना भी बड़ा महल, अट्टालिका क्यों हो, कितनी छोटी गरीब की झोपड़ी क्यों हो उसमें एक एक दरवाजा अवश्य होता है, इसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति के अंदर गुण-अवगुण अवश्य होते है।

व्यक्ति को जैसी संगति मिलती है वैसी ही परिणति उसकी हो जाती है। सज्जन व्यक्ति दुर्जन व्यक्ति के जीवन में से भी गुण खोज लेता है। ईर्षालु व्यक्ति कभी भी सुखी नहीं रह सकता, वह कभी भी गुणों को ग्रहण नहीं करता। दूसरों का सुख वह देख नहीं सकता। सच्ची भक्ति वही है जो भक्त को भगवान बना देती है।

संयोजक विनीत कुमार जैन ने बताया कि गुरुवार को भगवान की शांतिधारा अभिषेक, गणधरवलय विधान केसरगंज मंदिर में प्रारंभ हुआ। दोपहर में महिलाओं के द्वारा मंगल बधाई गीत एवं मेहंदी एवं हल्दी की रस्म सम्पन्न हुई तथा मेहंदी की रस्म की बधाई गीत भजन गाए गए।

दीक्षार्थी शुद्वात्म प्रकाश के परिजन जिसमें उनकी बेटी, पुत्र वधु, समधी, बहन एवं परिवार सदस्यों ने उनकी गोद भराई की रस्म एवं मेहंदी हल्दी की रस्म अदा की। जैन ने बताया कि शुक्रवार सुबह 6 बजे को केसरगंज जैन मन्दिर में अभिषेक, महाशांतिधारा (दीक्षार्थी द्वारा), बिरला सिटी वाटर पार्क में सुबह 9 बजे आहारचर्या, 11.00 बजे भव्य पण्डाल में दीक्षा संबंधी पूर्व कार्यक्रम होंगे। उक्त सभी कार्यक्रमों में देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्घालुओं के भाग लेने की संभावना है।

वसुनंदी महाराज के सानिध्य में आयोजित शांतिधारा अिभषेक सहित अन्य कार्यक्रम