पॉश कॉलोनी में पोल्ट्री फार्म!
िफर विवादों में मास्टर प्लान
मास्टर प्लान का सच : विधायक ने दिए घोटाले के उदाहरण
अजमेरके मास्टर प्लान से जहां भू-माफियाओं के वारे-न्यारे हो गए हैं, वहीं खुद इसे तैयार करने वाले एडीए को इससे करोड़ों रुपए की चपत लग रही है। बावजूद इसके अफसर आंखें मूंदकर प्लान को लागू करने में लगे हैं। एडीए शहर की पॉश कॉलोनी हरिभाऊ उपाध्याय मुख्य नगर योजना में करोड़ों रुपए की बेशकीमती अवाप्त भूमि का कब्जा इसलिए नहीं ले पा रहा है, क्योंकि मास्टर प्लान में उसका भू उपयोग पोल्ट्री फार्म है।
एडीए चाहता तो भू-उपयोग परिवर्तन कर इस जमीन से करोड़ों रुपए की आय अर्जित कर सकता था। इधर, विधायक अनिता भदेल ने भी नगरीय विकास विभाग द्वारा वर्तमान मास्टर प्लान के प्रारूप को हरी झंडी देने के खिलाफ कड़े तेवर अख्तियार कर लिए हैं। भदेल ने मुख्य नगर नियोजक को दो दिन पूर्व लिखे पत्र में मास्टर प्लान के प्रारूप में रखी गई खामियों के साथ लोगों को उपकृत करने का आरोप भी लगाया है।
यह दिए सुझाव
मास्टर प्लान 2023 में अजमेर विकास प्राधिकरण की दीपक नगर योजना की भूमि का भू-उपयोग कार्यालय बताया गया है। लेकिन नए मास्टर प्लान में व्यावसायिक दिखाया है। प्राधिकरण ने योजना की जमीन अवाप्त कर रखी है, लोगों ने अवैध रूप से व्यावसायिक निर्माण कर लिए हैं। मास्टर प्लान में भू उपयोग व्यावसायिक होने से निर्माण वैध होने के साथ सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व से वंचित होना पड़ेगा। साथ ही भूमि अवाप्त करने पर खातेदारों को व्यावसायिक दर से भुगतान करना होगा।
मास्टर प्लान 2023 में फॉयसागर सड़क के उत्तर एवं बीके कौल नगर के पश्चिमी सीमा प्रस्तावित भू-उपयोग अस्पताल, कॉलेज कार्यालय सहित अन्य कार्यों के लिए दिखा रखा था। वहीं 2033 के मास्टर प्लान में इसे आवासीय दिखाया गया है। वर्तमान में यहां पर काफी भूमि रिक्त है। इस फैसले से भू-माफियाओं को फायदा होगा।
मास्टर प्लान 2033 में सीकर सड़क पर पुष्कर बाइपास की दक्षिण दिशा में प्रस्तावित विश्वविद्यालय के एक एक तिहाई हिस्से को आवासीय दिखाया गया है। इससे प्रतीत होता है कि नगर नियोजन विभाग की भू- उपयोग विस्तार की गणना में गलती है।
1. मास्टर प्लान 2023 मौजूद है। नए जुड़े गांवों का ही मास्टर प्लान 2033 बनाया जाना चाहिए।
2. समस्त प्रस्तावित सड़कों को अवाप्त और लागू करने का एक प्लान होना चा