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पीड़ितों को मिले न्याय, दोषियों के खिलाफ हो सीबीआई जांच
दीअजमेर अरबन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड जमाकर्ता एवं सदस्य संघर्ष समिति के बैनर तले बुधवार को पीड़ित खाताधारकों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। संभागीय आयुक्त और कलेक्टर को राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहकारिता मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पीड़ित खाताधारकों को शीघ्र न्याय दिलवाने एवं बैंक के पूर्व प्रबंधकों एवं अधिकारियों द्वारा बरती गई घाेर लापरवाही के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की गई है। पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि दो माह के भीतर खाताधारकों को जमा राशि नहीं मिली तो सरकार और मंत्रियों का घेराव किया जाएगा।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रहलाद चंदेला के नेतृत्व में पीड़ित खाताधारक कलेक्ट्रेट पर एकत्र हुए। प्रदर्शन करने वालों में सीनियर सिटीजन खाताधारकों की संख्या अधिक थी। चंदेला ने बताया कि 1923 से संचालित बैंक ऑपरेटिव एवं सोसायटी एक्ट के तहत संचालित था। 18 दिसंबर 2000 को आरबीआई का लाइसेंस जारी हुआ। वर्ष 2006-07 में आरबीआई के औचक निरीक्षण के दौरान भारी अनियमितताएं उजागर होने के बाद वर्ष 2010 में बैंक को वैधानिक चेतावनी देते हुए 29 दिसंबर 2011 को इस बैंक के लेन-देन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। आरबीआई ने 15 सितंबर को बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया था।
धोखे का बैंक नाउम्मीदी के आंसू
तनाव में है प|ी
रेलवेके कर्मचारी सर्जून तीन साल बाद सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। उनका इस बैंक में 9 लाख रुपया जमा है। उन्होंने अपना घर का मकान बनाने के लिए इस बैंक में पैसा जमा करवाया था। यह सोचा था कि सेवानिवृत्ति के बाद अपना मकान बना लूंगा, लेकिन इससे पहले ही बैंक बंद हो गया है। सर्जून ने कहा कि इस वजह से उनकी प|ी भी तनाव में रहने लगी है।
बेचीथी जमीन
भगवानगंज सांसी बस्ती निवासी दौलत राम ने बताया कि उसने अपने गांव की जमीन को बेचकर इस बैंक में पैसा जमा कराया था। बैैंक में करीब 5 लाख रुपया जमा है। अब ठीक से दिखता नहीं है। बार-बार बैंक के चक्कर लगाने के बाद भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहा है। पैसा कब मिलेगा इसके लिए वह अब भी सहकार भवन के कई बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
पतिको है कैंसर
धोलाभाटानिवासी शांतिदेवी ने बताया कि मेहनत मजदूरी कर एक-एक पैसा जोड़कर बैंक में जमा करवाया था। करीब साढ़े चार लाख रुपए बैंक में जमा हैं। जरूरत के समय अपना ही पैसा काम नहीं रहा