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हाउसिंग बोर्ड में 52 लाख के घपले का आरोप, एसीबी से शिकायत

7 वर्ष पहले
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राजस्थानआवासन मंडल के आवासीय अभियंता पर बगैर योजना के 52 लाख रुपए की राशि के काम कराने के आरोप में एंटी करप्शन ब्यूरो को शिकायत दी गई है। आरटीआई जन चेतना मंच के तरुण अग्रवाल ने आवासन मंडल की वर्ष 2011 की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर ब्यूरो को शिकायत दी है। एसीबी ने शिकायत मुख्यालय को भेज दी है।

शिकायत पत्र में बताया गया कि ऑडिट रिपोर्ट से पता चला है कि राजस्थान आवासन मंडल कार्यालय परिसर में मुख्य सड़क की तरफ रिक्त भूमि पर व्यावसायिक उद्देश्य से किराए पर देने के लिए 732.33 स्क्वायर मीटर एरिया में बैंक भवन का निर्माण मार्च 2004 में मैसर्स अंकित कंस्ट्रक्शन से कराया गया था। इसकी लागत 30 लाख 95 हजार रुपए आई थी। इस भवन निर्माण से पूर्व किसी व्यावसायिक बैंक से कोई एग्रीमेंट या समझौता नहीं किए जाने के कारण करीब आठ साल से भवन अनुपयोगी पड़ा रहा। इससे करीब 52 लाख रुपए की अनियमितता हुई। ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि उक्त भवन निर्माण से पूर्व बैंकों में सर्वे करा मासिक किराया निर्धारित कर लिखित एग्रीमेंट किया जाता तो आठ साल तक अनुपयोगी पड़े बैंक भवन से प्राप्त होने वाली आय करीब 30 लाख रुपए होती, यह हानि लगातार बढ़ती गई। ऑडिट रिपोर्ट में आवासन मंडल के तत्कालीन आवासीय अभियंता पीएम डिगरवाल को मामले में जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन तीन वर्ष बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। एसीबी अजमेर ने शिकायत प्राप्त कर निर्देश के लिए मुख्यालय भिजवा दी है।

आरटीआई जन चेतना मंच के कार्यकर्ता देवेन्द्र सक्सेना ने एसीबी को शिकायत पत्र दिया है, इसमें आरोप लगाया गया है कि ब्यावर साकेत नगर निवासी सत्यनारायण सैन की ओर से हाउसिंग बोर्ड से सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना विलंब से उपलब्ध कराने पर सूचना आयोग ने अक्टूबर 2008 में आवासन मंडल पर पांच हजार की शास्ती आरोपित की थी। यह शास्ती तीस दिन के भीतर जमा करानी थी, लेकिन हाउसिंग बोर्ड के तत्कालीन आवासीय अभियंता एसके सक्सेना ने यह शास्ती जुलाई 2009 में राजकोष से जमा कराई। शिकायत प्राप्त होने के बारे में एसीबी के डीएसपी माधोसिंह ने अनभिज्ञता जाहिर की है।

आरटीआई जुर्माना राजकोष से जमा कराया