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अस्पताल के प्रसूति विंग में अवधि पार इंजेक्शन
गनीमत रही कि किसी को नुकसान नहीं हुआ
राजकीय अमृतकौर अस्पताल के लेबर रूम, पोस्ट गाइनिक वार्ड और गाइनिक वार्ड में प्रसूताओं को लगाए जाने वाले इंजेक्शन विटामिन बी कॉम्पलेक्स का स्टॉक रखा है। प्रसूताओं को कमजोरी की शिकायत होने पर उन्हें ताकत के लिए ये इंजेक्शन लगाए जाते हैं। रविवार को जब यह इंजेक्शन प्रसूता को लगने आया तो खुलासा हुआ। इंजेक्शन विटामिन बी कॉम्पलेक्स बैच नंबर 11-429 की निर्माण तिथि फरवरी 2013 है और अवसान तिथि जुलाई 14 थी। उनकी अवधि दो माह पूर्व ही समाप्त हो चुकी है।
इन्हें जानकारी नहीं
यह घटना तब सामने आई जब भास्कर में लेबर रूम की स्थिति पर प्रकाशित समाचार के बाद राज्य सरकार ने एक्शन लिया। शुक्रवार को ही ज्वाइंट कमिश्नर मधु विजयवर्गीय ने इस अस्पताल के लेबर रूम का निरीक्षण निरीक्षण किया था। जबकि रविवार को घाेर लापरवाही उजागर हो गई। विशेषज्ञ ने बताया कि अवधि पार इंजेक्शन लगाने से मरीज को जान का खतरा भी हो सकता है। अवधि पार इंजेक्शन से सबसे ज्यादा खतरा प्रसूताओं और गर्भवती महिलाओं को होता है।
मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। गायनिक प्रभारी डॉ. उर्मिला पोरवाल से बात कर मामले की जांच की जाएगी।
-डॉ.केके चौहान, डिप्टीकंट्रोलर
दो माह हो गए खराब हुए
प्रसूति विंग में प्रसूता को लगने आया यह इंजेक्शन।
प्रसूति रोग विंग में अकसर स्टाफ दूसरे कार्यों में व्यस्त रहता है। इंजेक्शन लगाने का काम नर्सिंग स्टूडेंट करता है या नियम विरूद्ध यशोदा भी इंजेक्शन लगाने से परहेज नहीं करती। कुछ ऐसी ही परिस्थितियों के चलते जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में भी मरीजों को जानवरों के इंजेक्शन लग गए थे। ऐसी ही लापरवाही यहां प्रसूताओं की जान पर भी बन सकती थी।
बड़ी लापरवाही