निजीकरण के विरोध में निकाली रैली
रेलवेमें निजीकरण के विरोध में शुक्रवार को कर्मचारियों ने रैली निकालकर विरोध जताया। ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के आह्वान पर नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एंप्लाइज यूनियन के बैनर तले देशभर में मुख्यालयों, मंडलों, कारखानों और शाखाओं में रैली, धरना एवं प्रदर्शन किया गया। कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ रोष जताया।
केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में यूनियन से जुड़े कर्मचारी सुबह 11 बजे रेलवे स्टेशन पर एकत्र हुए। रैली में नारेबाजी करते हुए कर्मचारी हाथों में तख्तियां और लाल झंडे लिए चल रहे थे। यह रैली पड़ाव, मदारगेट, कचहरी रोड होते हुए मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय पहुंची, जहां पर आमसभा में बदल गई। यहां मंडल सचिव अरुण गुप्ता ने कहा कि जिस उम्मीद के साथ केंद्र में सरकार को चुना गया, उसने महज 100 दिन में सबसे पहले केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों पर शिकंजा कसने का काम किया। उन्हें गैरजिम्मेदाराना बताकर बदनाम करने की कोशिश की गई। गुप्ता ने आरोप लगाया कि भारतीय रेल को जापान चीन के हाथों बेचने का प्रयास किया जा रहा है। मोहन चेलानी ने कहा कि केंद्र सरकार श्रम कानून में संशोधन कर पूंजीपतियों की सरकार के रूप में काम कर रही है। सरकार का एजेंडा विदेशी कंपनियों एवं उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का है। यूनियन के नेताओं ने बोनस के साथ छेड़छाड़ बंद करने, नई पेंशन स्कीम को समाप्त करने सहित अन्य मांगें पूरी नहीं होने पर नाराजगी जताई। सभा को मदन सिंह, गिरधारी, सुंदर सिंह, विपुल सक्सेना ने भी संबोधित किया।
कार्मिकोंका धरना
यूनियनके जोनल सचिव भूपेंद्र भटनागर के नेतृत्व में कारखाने के सैकड़ों कर्मचारियों ने धरना दिया। कर्मचारियों को संबोधित करते हुए भटनागर ने कहा कि लोको कैरिज कारखानों में पूर्णकालीन चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हाेने के कारण हादसे के शिकार कर्मचारियों को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाती है। कारखानों में एंबुलेंस नहीं होने से घायल कर्मचारी को अस्पताल ले जाने में समय लग रहा है। लगातार हादसे हो रहे हैं। कई बार सुरक्षा के जुड़े संसाधनों की मांग की गई, लेकिन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया है। वहीं कर्मचारियों को जीवन रक्षक दवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
निजीकरण के विरोध में शुक्रवार को रैली निकालते रेलवे कर्मचारी।