एसीबी की मेहरबानी से...
न्यायाधीश फूलचंद झाझड़िया ने प्रकरण में जांच अधिकारी एसीबी के तत्कालीन एएसपी भंवर सिंह नाथावत द्वारा की गई जांच को दूषित और लचीला बताते हुए कड़ी टिप्पणी की है। नाथावत की जांच कार्रवाई को लेकर अदालत ने 12 अलग-अलग बिंदुओं पर उनसे स्पष्टीकरण तलब करते हुए प्रकरण से डीजीपी को अवगत कराने के आदेश दिए हैं। इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से 148 गवाहों के बयान कराए गए, वहीं 829 दस्तावेज प्रदर्शित करवाए गए थे, लेकिन नाथावत की जांच ने पूरे मामले की कार्रवाई पर पानी फेर दिया। जबकि बचाव पक्ष की ओर से केवल 4 गवाह पेश हुए थे और करीब 50 दस्तावेज ही प्रस्तुत किए गए थे। आरोपियों की ओर से वकील गुरप्रीत सिंह सोढ़ी, अनिल सक्सेना, विजय मेहता, डीडी वर्मा, जेएस राणा ने पैरवी की।
यहहै मामला
एसीबीने प्रकरण की जांच में पाया कि पशुओं के आहार में बड़े पैमाने पर मिलावट की जा रही थी। यही नहीं, पशु आहार बनाने के लिए प्लांट में आने वाले कच्चे माल की आपूर्ति में भी बड़ा घोटला किया जा रहा था। बड़ी संख्या में ऐसे ट्रकों की पहचान हुई जो दूसरे राज्यों मे चल रहे थे और उनकी आमद प्लांट में बताई जा रही थी, जबकि प्लांट तो दूर, यह ट्रक अजमेर में ही नहीं आए थे। इस तरह करोड़ों के माल की फर्जी आमद दिखाकर फर्म से मोटा कमीशन लिया जा रहा था। एसीबी ने इस मामले में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थी। इसमें आय से अधिक संपत्ति का मामला अब भी लंबित है, जबकि पद के दुरुपयोग भ्रष्टाचार सहित फर्जीवाड़े के दो मामलों में फैसला गया है। पहले फैसले में शर्मा को दो साल की कैद हुई थी, जबकि तीन आरोपी बरी हो गए थे। दूसरे मुकदमे में शर्मा सहित चारों आरोपी बरी हो गए हैं। पहले मामले में भी भंवर सिंह नाथावत की लापरवाही कार्यशैली को लेकर अदालत ने कड़ी टिप्पणी की थी।