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...तो छिन जाएगा गरीबों का आशियाना

7 वर्ष पहले
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अजमेरविकास प्राधिकरण में शामिल गांवों की सरकारी एवं गैर सरकारी जमीनों को बिना भौतिक सत्यापन बिना मौका सर्वे रिर्पोट किए बगैर अजमेर विकास प्राधिकरण के पक्ष में ट्रांसफर करने को लेकर जिले के जनप्रतिनिधियों ने विरोध किया है। उनकी मांग है कि भौतिक सत्यापन मौका सर्वे रिर्पोट के बाद ही गांवों की जमीनों को एडीए के पक्ष में ट्रांसफर किया जाए।

अजमेर विकास प्राधिकरण संघर्ष समिति अध्यक्ष जिला परिषद सदस्य राजेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि पहले ही ग्रामीण पेराफेरी की समस्याओं से त्रस्त थे, वही अब एडीए प्रशासन गांवों की जमीन को बिना मौका रिपोर्ट बनाए तथा बिना भौतिक सत्यापन किए कागजी तौर पर एडीए के पक्ष में ट्रांसफर कर रहा है। जिससे वर्षों से उक्त जमीनों पर काबिज लोगों को नुकसान उठाना पड़ेगा। बताया गया कि प्राधिकरण जिन जमीनों को रिक्त मान रहा है, उन पर 70 प्रतिशत हिस्से पर लोगों ने वर्षों से मकान, बाड़े अन्य निर्माण कराए हुए है। जिनको सूचीबद्ध किये बिना ही एडीए अपने नाम ट्रांसफर कर रहा है। जबकि एडीए संघर्ष समिति के अध्यक्ष जिला परिषद सदस्य राजेन्द्र सिंह रावत ने कई बार अजमेर विकास प्राधिकरण प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर बताया था कि भौतिक सत्यापन, मौका सर्वे रिर्पोट बनाकर तथा निर्माणों को सूचीबद्ध करने के बाद ही रिक्त पड़ी भूमि को एडीए के पक्ष में ट्रांसफर किया जाना चाहिए। सदस्य रावत ने इस संबंध में 27 दिसंबर 2013 को विधिवत आपत्ति भी दर्ज करवाई थी। किंतु प्राधिकरण ने उन पर गौर नहीं किया।