अब स्थायी नाजिम की तलाश
सूफीसंत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह का प्रबंध संभालने वाली दरगाह कमेटी के लिए अब स्थायी नाजिम की तलाश पुन: शुरू हो गई है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्रालय ने इस पद के लिए योग्य अफसरों से आवेदन मांगे हैं।
दरगाह कमेटी में स्थायी नाजिम लंबे समय से नहीं हैं। इस पद का पहले एडिशनल चार्ज मंत्रालय में निदेशक मोहम्मद अफजल संभाल रहे थे, लेकिन उनके दिल्ली में रहने से कामकाज प्रभावित हो रहा था। अफजल करीब 6 महीने तक एडिशनल चार्ज संभालते रहे। बाद में मंत्रालय ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अफसर अशफाक हुसैन को मूल विभाग के साथ दरगाह नाजिम का अतिरिक्त चार्ज भी सौंपा। 16 जुलाई से हुसैन ही दरगाह नाजिम का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं, लेकिन हुसैन के पास स्वयं अपने विभाग का दायित्व भी है। वे भी इस पद के लिए आवश्यक समय नहीं दे पा रहे हैं। कमेटी सूत्रों के मुताबिक इन दिनों हुसैन को जम्मू कश्मीर में हो रहे चुनाव में पर्यवेक्षक बना कर भेजा हुआ है। करीब एक महीना वे कश्मीर में ही रहेंगे। ऐसे में दरगाह कमेटी में केवल रूटीन के कार्य ही संपन्न हो पा रहे हैं। कमेटी सूत्रों के मुताबिक दरगाह विकास के कार्य गति नहीं पकड़ पा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्रालय ने फिर इस पद के लिए अफसर तलाशने की कवायद शुरू कर दी है। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि अभी तक राजस्थान या अन्य किसी प्रदेश से किसी अफसर ने इस पद के लिए रुचि नहीं दिखाई है। एक भी आवेदन मंत्रालय को नहीं मिल सका है।
आवेदन मांगे
मौलवी शिक्षकों के पहुंचे आवेदन
मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक दरगाह नाजिम का पद मंत्रालय में उपसचिव स्तर के अधिकारी के समकक्ष होता है। नाजिम पद के लिए मंत्रालय ने प्रशासनिक सेवा के अफसरों से आवेदन मांगे हैं, लेकिन मंत्रालय को मौलवी शिक्षकों के कुछ आवेदन मिले हैं। जबकि ये लोग इस पद के लिए योग्यता ही नहीं रखते।
^मंत्रालय ने दरगाह नाजिम पद के लिए अफसरों से आवेदन मांगे हैं। अभी कोई आवेदन नहीं मिला है।\\\' -मोहम्मदअफजल, निदेशक,केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्रालय, नई दिल्ली