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अल्पसंख्यक वर्ग का प्रमाण पत्र नहीं दिए जाने का मुद्दा सीएम तक पहुंचा

7 वर्ष पहले
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जिलेके विभिन्न क्षेत्रों में चीता मेहरात समुदाय के लोगों को अल्पसंख्यक प्रमाण-पत्र जारी नहीं किए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए समुदाय ने अब सीएम वसुंधरा राजे से इस मामले में दखल देने का आग्रह किया है। राजस्थान चीता मेहरात (काठात) महासभा के अध्यक्ष कालू खां काठात और सचिव प्रो. जलालुद्दीन काठात ने बताया कि चीता-मेहरात समुदाय बहादुर और देशप्रेमी कौम है। समुदाय ने देश सेवा में अपने कई सपूत न्यौछावर किए हैं। भारत के राजपत्र 27 जनवरी 2014 राजस्थान सरकार के 14 मार्च 2013 को जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी, बौद्ध जैन धर्मावलंबी अल्पसंख्यक वर्ग के अंतर्गत अनुसूचित हैं। इसमें केवल धर्म का उल्लेख है, किसी जाति का नहीं है। इधर, राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग में भी 3 अक्टूबर 2013 को परिवाद संख्या 23 में पारित निर्णय में साफ लिखा है कि पत्रावली पर उपलब्ध दस्तावेजों, ज्ञापनों, अभ्यावेदनों, आदेश ऐतिहासिक स्रोतों से परिवाद में वर्णित चीता-मेहरात समुदायों में मुस्लिम अनुयायियों का विद्यमान होना साबित है। इसे देखते हुए आयोग ने जिला कलेक्टर अजमेर, राजसमंद पाली को निर्देशित किया कि चीता मेहरात समुदाय के जो व्यक्ति अल्पसंख्यक होने का शपथ पत्र सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करे, उन्हें अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी किए जाएं। काठात का कहना है कि इस फैसले के समय उपखंड अधिकारी ब्यावर मसूदा, तहसीलदार ब्यावर मदन जीनगर तहसीलदार मसूदा ओमप्रकाश शर्मा भी उपस्थित थे। इसके बावजूद ब्यावर मसूदा के तहसीलदार अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी नहीं कर रहे हैं।

15के लिए मांगा समय : प्रो.काठात ने बताया कि सीएम की 15 दिसंबर को अजमेर यात्रा के दौरान महासभा के एक प्रतिनिधिमंडल ने समस्या के समाधान के लिए समय मांगा है।