अजमेर. मंदिर का निर्माण वर्ष 1855 में हुआ था। मंदिर में प्रथम तल और द्वितीय तल की दीवारों और छत पर सोने की नक्काशी धार्मिक संदेश सोने से लिखे गए हैं। मंदिर की भव्यता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इसके दरवाजे, खिड़कियों में भी सोने का काम किया गया है। चांदी, सोने, अष्टधातु, हीरे, पन्ने और स्फटिक से बनी मूर्तियां, सिंहासन और चांदी-सोने के छत्रों की कीमत करोड़ों में है।
जांच के दौरान सीओ वैभव शर्मा और अन्य अधिकारियों ने व्यवस्थापकों से जानकारी ली तो पता चला कि यहां सीसी कैमरे नहीं लगे थे। सायरन को चोरों ने निष्प्रभावी कर दिया था। चौकीदारी करने वाला गोपाल मंदिर के बाहरी हिस्से में बने कमरे में था।
वारदात रोकना पुलिस की जिम्मेदारी :एसपी महेंद्र चौधरी के अनुसार जैन मंदिर या अन्य चोरी की वारदातें रोकना पुलिस की जिम्मेदारी है, इस मामले में तफ्तीश जारी है। पिछले दिनों फॉयसागर रोड जैन मंदिर में घुसे शातिरों को पुलिस ने जान जोखिम में डाल पकड़ा था, जबकि शातिरों ने फायरिंग की थी।