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शिक्षण संस्थाओं में विजन सर्टिफिकेट हो अनिवार्य
स्ट्रेबिस्मस एंड पीडियाट्रिक ऑप्थोमोलोजी सोसायटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में शनिवार से अनंता रिसोर्ट में दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस शुरू हुई। इसमें देशभर के करीब दो सौ से अधिक नेत्ररोग विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। सभी नेत्ररोग विशेषज्ञों की राय है कि सभी शिक्षण संस्थाओं में विजन सर्टिफिकेट अनिवार्य होना चाहिए] ताकि बच्चों में आंखों में होने वाली बीमारी का पता चल रहे। पहले दिन पांच सत्र आयोजित किए गए। इनमें बाहर से आए चिकित्सकों ने अपने-अपने क्षेत्र में की गई रिसर्च की जानकारी दी। पहले सत्र में \\\"आम बचपन में तिर्यक दृष्टि\\\' पर चिकित्सकों ने विचार रखे। जयपुर से आए डॉ. वीरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि बच्चों में भी मोतियाबिंद होता है। इसका पता समय पर चल जाना चाहिए, ताकि उपचार संभव हो सके। दिल्ली से आए डॉ. सुभाष ने बताया कि छोटे बच्चों में आंखों की जांच समय-समय पर करवानी चाहिए। जयपुर के योगेश शुक्ला ने बताया के बच्चों में भेंगापन का उपचार संभव है। शंकरा आई हॉस्पिटल लुधियाना से आई डॉ. मधु ने बताया कि बच्चों में कई बीमारियां आमतौर पर प्रारंभिक जांच में सामने नहीं आती हैं। अभिभावक भी बच्चों के प्रति जागरूक रहें।
बच्चों की आंखों में किसी प्रकार की परेशानी है तो विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। शंकरा नेत्रालय चेन्नई से आई डॉ. मीनाक्षी एवं डॉ. श्रीकांत ने बताया कि बच्चों में रोशन का विकास आठ साल तक होता है। उनकी स्क्रीनिंग जरूरी होती है।
स्ट्रेबिस्मस एंड पीडियाट्रिक ऑप्थोमोलोजी सोसायटी ऑफ इंडिया की दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस शुरू