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मेजर मिनरल के 18824 आवेदन अपात्र

6 वर्ष पहले
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अजमेर| भारतसरकार द्वारा जारी माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट ऑर्डिनेंस 2015 (एमएमआर डी अध्यादेश) के संबंध में राज्य सरकार को दिशा-निर्देश मिल गए हैं। इसके बाद प्रदेश में मेजर माइनिंग लीज के लिए आवेदन करने वाले सभी 18824 आवेदक अपात्र घोषित कर दिए गए हैं। इधर, मेजर मिनरल के खनन पट्टों की अवधि अब 50 वर्ष कर दी गई है। निदेशालय खान एवं भू-विज्ञान विभाग के अतिरिक्त निदेशक पंकज गहलोत ने भारत सरकार द्वारा जारी नियमों के बाद सभी खनि अभियंताओं को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। गहलोत द्वारा जारी आदेश के मुताबिक भारत सरकार द्वारा एमएमआर डी अध्यादेश 2015 जारी किया गया है। इसके तहत धारा 8 का समावेश किया गया है। इसके अनुसार खनन पट्टों की अवधि स्वतः ही 50 वर्ष हो चुकी है। इसी प्रकार प्रधान खनिज (मेजर मिनरल) के विभिन्न लंबित आवेदन पत्र धारा 10 के अंतर्गत अपात्र घोषित हो चुके हैं। निदेशालय सूत्रों के मुताबिक अजमेर समेत प्रदेश में कुल 18 हजार 824 आवेदकों ने मेजर मिनरल लीज के लिए आवेदन किए हुए थे। अब ये सभी अपात्र हो गए हैं। दैनिक भास्कर ने 21 जनवरी के अंक में “प्रदेश के 18824 लीज आवेदकों के टूटे सपने’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर सबसे पहले जानकारी दी थी। खान एवं भू-विज्ञान विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश भर में माइनिंग लीज (एमएल) के लिए 15453 और प्रोस्पेक्टिंग लाइसेंस (पीएल) के लिए 3371 लोगों ने आवेदन कर रखे हैं। इनमें अकेले अजमेर में ही 458 आवेदक थे।

इनखनिजों के लिए हैं आवेदन : विभागीयसूत्रों के मुताबिक मेजर मिनरल (प्रधान खनिज) के रूप में क्वार्ट्ज-फेल्सपार, माइका, लेड-जिंक और वर्मीकुलाइट आदि मिनरल्स शामिल हैं। क्वार्ट्ज-फेल्सपार का उपयोग सिरेमिक टाइल्स निर्माण में सर्वाधिक होता है। मुख्य रूप से यह मिनरल अजमेर में बहुतायत से मिलता है।

28तक करनी है कार्रवाई : अतिरिक्तनिदेशक गहलोत ने सभी एमई एएमई को भारत सरकार और खान विभाग राजस्थान के संयुक्त सचिव द्वारा जारी आदेशों की प्रति भी भेज कर 28 फरवरी तक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एमई एएमई को प्रारूप बी भी भेजे गए हैं। ये प्रारूप जिले संबंधित क्षेत्र में वर्तमान में उपलब्ध खनन पट्टों में संशोधन की कार्रवाई कराने के लिए भेजे गए हैं।