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आरोपी अफ्रीकन नागरिक की रिमांड अवधि 7 दिन बढ़ाई

6 वर्ष पहले
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साउथ अफ्रीका से बिछता है ठगी का जाल

मोबाइलपर मैसेज भेज एक करोड़ की लॉटरी निकलने का झांसा देकर ठगी करने के आरोपी दक्षिण अफ्रीकी नागरिक को पुलिस ने सोमवार को अदालत में पेश किया। कोर्ट ने उसकी रिमांड अवधि 7 दिन बढ़ा दी है। अफ्रीकन नागरिक मुसीफी खुसी पुत्र मुसीफी को सिटी थाना पुलिस ने सोमवार को रिमांड अवधि पूरी होने के बाद पुन: अदालत में पेश किया था।

आरोपी ने धोखाधड़ी पूर्वक फूलागंज मोहल्ला निवासी रीना करोती प|ी सुधीर करोती के मोबाइल पर एक करोड़ की लॉटरी जीतने का मैसेज कर लाॅटरी के पैसे प्राप्त करने के लिए विभिन्न खातों में 2,96,500 रुपए जमा कराने को कहा था। पीड़ित रीना देवी के परिजनों की सूझबूझ से 6 फरवरी की रात नसीराबाद पहुंचते ही मुसीफी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक डिजिटल बॉक्स, पासपोर्ट, नकली ब्लैक डॉलर और ब्लैक कागजों को डॉलरों में बदलने का केमिकल बरामद किया था। उसे 7 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया गया। सिटी थाना प्रभारी अशोक मीणा के अनुसार पिछली रिमांड अवधि में आरोपी से पूछताछ में डॉलर बनाने का केमिकल मुंबई से लाना बताया गया, जिसकी जांच के लिए उसे फिर से रिमांड पर लिया गया है।

ऐसे क्लीन करते हैं ब्लैक करेंसी

नाइजीरियनहैकर्स ठगी की वारदात को अंजाम देने के लिए अपने शिकार को पहले काला रंग लगा असली डॉलर देकर वैक्टरॉल पेस्ट, टैबी मेथोनिक और एसएसडी रसायन से उसे क्लीन कर दिखाते हैं। इससे ठगी के शिकार को विश्वास हो जाता है कि सूटकेस में रखे सभी डॉलर असली हैं। जबकि यह खेप सिर्फ डॉलर की फोटो कॉपी होती है। कई बड़े देशों की पुलिस इस तरह के साइबर क्राइम से बचने के लिए समय-समय पर देशवासियों को विज्ञापनों के माध्यम से अलर्ट करती रहती है।

तोफिर इंटरपोल से लेंगे मदद

^दक्षिणअफ्रीका मूल के आरोपी मुसीफी खुसी से पूछताछ कर गैंग के नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। ब्लैक करेंसी के लिए पीड़ित ने जिन खातों में पैसा जमा करवाया था, उनकी डिटेल निकलवाई गई है। इस गैंग से जुड़े ठगों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय ठगों पर शिकंजा कसने के लिए इंटरपोल की मदद ली जाएगी। -हरिप्रसादसोमानी, सीआे, नसीराबाद वृत्त

}नसीराबाद पुलिस के हत्थे चढ़े दक्षिणी अफ्रीकी मूल के मुसीफी खुसी ने किया खुलासा

}अंतरराष्ट्रीय गैंग की धरपकड़ के लिए ली जाएगी इंटरपोल की मदद

अतुलसिंह | अजमेर

दक्षिणअफ्रीकी देश नाइजीरिया, फ्रिटॉन, जांबिया सहित अन्य देशों से लुभावने ऑफर वाले ई-मेल रहे हैं जिनमें करोड़ों के डॉलर देने का झांसा देकर ठगी की जा रही है। नसीराबाद में पकड़े गए अंतरराष्ट्रीय गैंग के मास्टरमाइंड मुसीफी खुसी ने यह खुलासा किया है। दक्षिण अफ्रीकी मूल का मुसीफी ब्लैक करंसी बिग स्कैम का मास्टरमाइंड है। जिला पुलिस ने राजस्थान के सभी जिलों सहित अन्य राज्यों की पुलिस को ई-मेल कर मुसीफी के बारे में जानकारी देकर देशभर में हुई इस तरह की वारदातों की जानकारी मांगी है। अंतरराष्ट्रीय गैंग की धरपकड़ के लिए इंटरपोल की मदद ली जाएगी।

पुलिस के मुताबिक मुसीफी से पूछताछ के लिए अफ्रीकी भाषा के जानकारों से मदद ली जा रही है। पीड़ित युवक सन्नी द्वारा जिन खातों में पैसा जमा कराया गया, संबंधित बैंकों से उन खातों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने देशभर के सभी पुलिस थानों पर ई-मेल कर मुसीफी का फोटो आैर तरीका-ए-वारदात की जानकारी देकर इस तरह से हुई ठगी की वारदातों से अवगत कराने को कहा है। अंदेशा है कि इस अंतरराष्ट्रीय गैंग में बड़ी संख्या में युवक शामिल हैं, जिनके तार विदेशों में बैठे ठगों से जुड़े हैं। मुसीफी मुंबई के स्थानीय युवकों के साथ मिलकर इस तरह की वारदातों को अंजाम देता है। वह गैंग का मास्टरमाइंड है। गैंग का नेटवर्क भारत के कई बड़े शहरों में फैला है। इस नेटवर्क को खंगालने के लिए पुलिस टीमें फरीदाबाद, दिल्ली आैर मुंबई भेजी जा रही हैं। देश में इस तरह की कई वारदातें सामने चुकी हैं, इस वजह से पुलिस को अंदेशा है कि मुसीफी से पूछताछ में बड़े गैंग का खुलासा होगा।

कारोबारीसे ठगे थे 45 लाख रुपए

तीनसाल पूर्व दस करोड़ की लॉटरी निकलने का झांसा देकर नाइजीरियन युवकों ने दिल्ली के एक युवक के साथ मिलकर अजमेर के कारोबारी से 45 लाख रुपए ठगे थे। ब्लैक करंसी का झांसा देकर ठगी की वारदात को अंजाम दिया गया था। यह खेप एक लेदर के सूटकेस में थी। सूटकेस में रखे 50-50 डॉलर की दो गड्डी को छोड़कर बाकी सभी गड्डियों पर काला रंग लगा था। नाइजीरियन युवकों ने खेप सौंपते समय एक केमिकल की बोतल देकर डॉलर पर उक्त काला रंग हटाने को कहा था। बाकायदा उन्होंने एक डॉलर पर से यह काला रंग हटाकर डेमो भी दिया था, लेकिन जब कारोबारी ने उक्त केमिकल से डॉलर पर लगे काले रंग को हटाने की कोशिश की तो माजरा कुछ और ही निकला। एक भी डॉलर से काला रंग नहीं हटा। हालांकि पीड़ित कारोबारी कर विभाग की कार्रवाई के डर से सामने नहीं आया था।

नसीराबाद. अफ्रीकन नागरिक को न्यायालय में पेश करने ले जाती पुलिस।