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वाट्सएप पर गुरु की अपील, शिष्यों ने भेजी टेबल-कुर्सी

6 वर्ष पहले
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अतुल सिंह| अजमेर @ atul 9772216262

अजमेरकी पीसांगन पंचायत समिति के गांव डोडियाणा के सरकारी विद्यालय में वर्षों से कक्षाओं में दरी-पट्टी पर बैठते रहे छात्र-छात्राएं अब टेबल-कुर्सी पर बैठने लगे हैं। यह संभव हो सका है सोशल मीडिया का सशक्त माध्यम बने चुके वाट्स एप के जरिए।

स्कूल के एक शिक्षक ने वाट्स एप पर अपने पुराने शिष्यों से एक अपील की, जो रंग ले आई। दो शिष्यों ने विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए टेबल कुर्सी मुहैया करवाकर एक मिसाल पेश की है। बच्चों ने बताया कि दरी-पट्टी पर बैठने में केवल लिखने में परेशानी आती थी, बल्कि सर्दी बारिश के समय हाल-बेहाल था। गुरु की प्रेरणा से अब अन्य पूर्व छात्र भी सहयोग के लिए आगे आने लगे हैं।

जल्द ही सभी कक्षाओं के लिए टेबल-कुर्सी

डोडियाणाके सरकारी स्कूल में कुल 350 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। दसवीं में 37 आैर नवीं कक्षा में 39 छात्र-छात्राएं पढ़ती हैं। ग्रामीण परिवेश के यह विद्यार्थी वर्षों से कक्षाओं में दरी-पट्टी पर बैठते रहे हैं। दुबे के शिष्य धर्मेंद्र आैर चंद्रकांत ने इन विद्यार्थियों के लिए 1300-1300 रुपए का टेबल-कुर्सी का सेट बनवाकर स्कूल को भेंट किया। स्कूल को ऐसे कुल 66 सेट दिए गए हैं। दुबे बताते हैं कि ग्रुप में शामिल अन्य शिष्यों ने भी सरकारी स्कूलों में सहयोग करने में अपनी रुचि दिखाई है। इधर, कक्षाओं में फर्नीचर की माकूल व्यवस्था होने से विद्यार्थी खुश हैं। वे सुविधा मिलने से पढ़ाई के दौरान सहज महसूस कर रहे हैं।

डोडियाना स्कूल में पहले बच्चे दरी-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करते थे, अब वहां कुर्सी टेबल उपलब्ध करा दी गई है।

रामावि डोडियाणा में कार्यरत शिक्षक मुकेश दुबे वर्ष 2004-05 में डीएवी स्कूल में कार्यरत थे। बाद में वे समानीकरण के तहत सरकारी स्कूल में पदस्थ हुए। दुबे बताते हैं कि पिछले दिनों उन्होंने वाट्स एप ग्रुप बनाकर पुराने विद्यार्थियों को जानकारी दी कि सरकारी स्कूल में बच्चे दरी-पट्टी पर बैठते हैं, उन्हें लिखने में काफी परेशानी होती है। इस पर डीएवी के पूर्व छात्र धर्मेंद्र आैर चंद्रकांत ने सरकारी स्कूल की 9वीं 10वीं कक्षा के सभी छात्र-छात्राओं के लिए टेबल-कुर्सी के सेट उपलब्ध कराए हैं।

अब सुधरेगी 1954 से बंद लाइब्रेरी की दशा

दुबेके इस प्रयास की विद्यालय के प्राचार्य श्रीकिशन मंडावरिया ने भी सराहना करते हुए इसे अनकरणीय बताया है। दुबे बताते हैं कि जल्द ही शिष्यों के सहयोग से लाइब्रेरी की दशा सुधारी जाएगी। इस लाइब्रेरी में 1954 से पुस्तकें अलमारी में बंद पड़ी हैं। दुबे ने बताया कि विद्यालय में एनसीसी की छात्राओं ने इसी वर्ष पहली बार नेशनल इंटिग्रिटी कैंप (एनआईसी) भी अटैंड किया है। जल्द ही अन्य कक्षाओं के लिए फर्नीचर व्यवस्था शिष्यों के सहयोग से कराएंगे।

80 फीसदी सरकारी स्कूलों का यही हाल

अजमेरजिले में कुल 1993 स्कूल हैं। इनमें से 821 प्राथमिक, 682 उच्च प्राथमिक आैर 490 माध्यमिक उच्च माध्यमिक हैं। जिलेभर में 80 फीसदी सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनमें वर्तमान में बच्चे जमीन पर दरी-पट्टी पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। हाल ही शिक्षा राज्यमंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी ने क्षेत्र के भामाशाहों की सूची बनाकर उनसे स्कूल विकास में सहयोग लेने के लिए कहा था।