अजमेर। सरपंच पद का चुनाव लड़ने के लिए जाली मार्कशीट और टीसी लगाने वाले सरपंचों की लिस्ट में अब जिले की अरांई पंचायत समिति की भगवंतपुरा ग्राम पंचायत की सरपंच करमा जाट का नाम भी जुड़ गया है। ऐसे मामलों में अब तक जितने नाम सामने आए, उन सभी ने आठवीं पास के दस्तावेज प्राइवेट स्कूलों के पेश किए थे, लेकिन करमा की ओर से पेश दस्तावेज सरकारी स्कूल के थे। जिस स्कूल के दस्तावेज पेश किए, उसके प्रधानाचार्य ने स्पष्ट कहा है कि करमा उनकी स्कूल में कभी पढ़ी ही नहीं।
करमा ने सरपंच पद का चुनाव लड़ने के लिए खुद को आठवीं कक्षा पास बताया था। इसके पक्ष में उसने अजमेर जिले के राजकीय माध्यमिक विद्यालय बांसेली की आठवीं पास की मार्कशीट और टीसी नामांकन के दौरान पेश की थी। दस्तावेजों में टीसी पर पुस्तक क्रमांक 06 सी.नं.14, प्रवेश क्रमांक 445 अष्टम कक्षा उत्तीर्ण तथा अंकतालिका में नामांकन संख्या 92 अंकित है। टीसी पर 10 अक्टूबर 2011 की तारीख है।
जिला निर्वाचन अधिकारी से की शिकायत
प्रधानाचार्य से सूचना प्राप्त होने के बाद ग्रामवासियों राम सिंह, सुखपाल व राजू ने उक्त मामले में गुरुवार को जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी आरुषि ए मलिक को शिकायत दी है। फर्जी व कूटरचित दस्तावेज पेश कर चुनाव जीतने के मामले में कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है। सरपंच करमा जाट को सरपंच पद से बर्खास्त करने व कूटरचित दस्तावेज बनाने वाले उसके पति चेतन जाट के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की गई है।
प्रधानाचार्य ने कहा-जाट ने स्कूल में कभी पढ़ाई की ही नहीं
करमा के दस्तावेजों को लेकर गांव के राम सिंह, सुखपाल व राजू ने सूचना का अधिकार कानून के तहत बांसेली स्कूल के प्रधानाचार्य को एक प्रार्थना पत्र पेश किया था। प्रधानाचार्य ने जो जानकारी उपलब्ध करवाई, उसके मुताबिक करमा जाट ने उनके स्कूल में कभी पढ़ाई की ही नहीं।
प्रधानाचार्य के मुताबिक करमा ने जिस पुस्तक संख्या 6 पर अपनी टीसी जारी होना बताया, उसमें करमा पुत्री हीरालाल के नाम से कोई टीसी काटी ही नहीं गई। यह पुस्तक संख्या 6 भी सत्र 1996-97 की है। करमा की टीसी 10 अक्टूबर 2011 को जारी होना बताई गई। उल्लेखनीय है कि करमा ने जो अंकतालिका पेश की, उसमें उसकी जन्म दिनांक 4 मार्च 1992 लिखी हुई है। यानी पुस्तक संख्या 6 उसके जन्म के चार साल बाद ही अस्तित्व में आ गई थी।
इस टीसी पर जो प्रवेश क्रमांक 445 लिखा है उसके बारे में प्रधानाचार्य ने लिखित तौर पर स्पष्ट किया है कि प्रवेश क्रमांक 445 पर छात्रा मीनाक्षी परिहार पुत्री राकेश परिहार कक्षा 6 अंकित है, जिसने 5 जुलाई 2005 को प्रवेश लिया था। सूचना का अधिकार कानून के तहत प्रधानाचार्य ने जो जवाब दिया है, उसके मुताबिक सत्र 2010-11 में कक्षा आठ में नामांकन संख्या 92 अंकित ही नहीं है। करमा ने जो अंकतालिका पेश की, उस पर नामांकन क्रमांक 92 अंकित है।
(फोटो- सरपंच जाट की ओर से पेश की गई फर्जी अंकतालिका व टीसी।)