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दरगाह एक्ट संशोधन में अंजुमनों से भी लेंगेे सुझाव
अजमेर| दरगाहख्वाजा साहब एक्ट 1955 में संशोधन के लिए जारी कवायद में अब खादिमों की दोनों संस्थाओं से भी सुझाव लिए जाएंगे। नई दिल्ली में बुधवार को आयोजित बैठक में यह निर्णय किया गया। इसे लेकर अगली बैठक में अंजुमन सैयदजादगान और अंजुमन शेखजादगान के प्रतिनिधियों को भी बुलाया जाएगा। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्रालय के सचिव राकेश मोहन की अध्यक्षता में नई दिल्ली के पर्यावरण भवन में बैठक हुई। बैठक में शामिल दरगाह कमेटी के सदर असरार अहमद खान ने बताया कि दरगाह एक्ट 1955 में किए जाने वाले संशोधनों से पहले मंत्रालय दरगाह के खादिमों से भी चर्चा करेगा। अगली बैठक में अंजुमन सैयदजादगान और अंजुमन शेखजादगान के प्रतिनिधियों को बुलाया जा सकता है।
नहींहुए अहम निर्णय
दरगाहएक्ट 1955 में संशोधन के लिए गठित कमेटी के पांच में से दो सदस्य जस्टिस अहमद रजा और सुहैल फारूकी बैठक में शामिल नहीं हो सके। बैठक में कमेटी सदर असरार अहमद खान, नाजिम अशफाक हुसैन और एडवोकेट जतन चंद्र ही उपस्थित रहे। ऐसे में बैठक में अहम निर्णय नहीं लिए जा सके। दरगाह के संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिशों का ही अध्ययन किया गया। यह समिति 2000 में अजमेर आई थी और दरगाह में जायरीन की सुविधाओं और संबद्ध पक्षों के अधिकारों को लेकर विभिन्न सुझाव दिए थे। कमेटी इन सुझावों को भी गंभीरता से ले रही है और माना जा रहा है कि इसमें से भी कुछ महत्वपूर्ण सुझावाें को संशोधित एक्ट में शामिल किया जा सकता है।