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एमबीडी कंपनी घोटाले में चार दोषियों को केैद

6 वर्ष पहले
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लोगोंसे करोड़ों रुपए की ठगी के मामले में सुर्खियों में रही मार्स बिल्ड होम डवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर सहित चार लोगों को धोखाधड़ी का दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल कैद की सजा दी है। साथ ही चारों पर डेढ़-डेढ़ हजार रुपए जुर्माना भी लगाया है। एक आरोपी को बरी कर दिया गया है, वहीं दो आरोपी फरार हैं।

मामले के अनुसार एमबीडी कंपनी के चार सदस्यों ने मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष राजोरिया और उमा सोलंकी के खिलाफ धोखाधड़ी अमानत में खयानत के आरोप में परिवाद दायर किया था। परिवाद में चिटफंड एंड मनी सर्कुलेशन एक्ट के तहत भी कार्यवाही की गुहार लगाई गई थी। पुलिस ने जांच के बाद इस मामले में राजोरिया और सोलंकी के साथ ही प्रगति नगर कोटड़ा निवासी सुमित्रा, पीसांगन निवासी मनोज शर्मा और प्रकाश चंद शर्मा, रोडवेज बस स्टैंड के सामने रहने वाले संदीप शौर्य के अलावा क्रिश्चियन गंज निवासी विजय टांक के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। परिवादी पक्ष का आरोप था कि राजोरिया अन्य आरोपियों ने लोगों से रकम ऐंठने के लिए एमबीडी कंपनी बनाई। परिवादी कमलेश गुर्जर ने खुद 5500 रुपए में सदस्यता ग्रहण की और सदस्यों की चेन बनाते हुए 1473 निवेशकों से 5500 रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से लाखों रुपए कंपनी में जमा कराए। इसी तरह परिवादी मनोहरलाल, गोपाल लाल और घीसू खां ने भी निवेशकों के जरिये लाखों रुपए का निवेश किया। कंपनी ने निवेश के बदले कई गुना रकम मकान प्लॉट देने के लुभावने वादे कर लोगों से रुपए हड़पे थे। नवंबर 2011 में कंपनी का वैशालीनगर स्थित मुख्य कार्यालय बंद हो गया और कंपनी के डायरेक्टर सहित अन्य लोग भूमिगत हो गए। कंपनी में निवेश करने वाले आमजन और उनसे निवेश करने वाले कंपनी के सदस्यों को मालूम पड़ा कि उनसे ठगी की गई है। इस घोटाले में दो अन्य मुकदमों भी दर्ज हुए थे। आरोपी विजय टांक के वकील अशोक माथुर की दलील थी कि टांक तो खुद निवेशक हैं और ठगी का शिकार हुआ है। अभियोजन टांक के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर पाया। वहीं आशीष राजोरिया, सुमित्रा, मनोज और प्रकाश चंद के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और 120 बी के तहत आरोप साबित पाए। चिटफंड एक्ट में आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए। अदालत ने चारों आरोपियों धारा 420 में तीन-तीन साल और 120 बी में छह-छह माह कैद की सजा सुनाई और जुर्माना भी किया है। संदीप शौर्य और उमा सोलंकी फरार बताए जाते हैं, उनके खिलाफ मामला लंबित है।