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44 साल बाद इतिहास ने अपने को दोहराया

7 वर्ष पहले
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अजमेर. नसीराबाद विधानसभा उप चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को हराकर अपने गढ़ पर फिर से कब्जा कर लिया है। विधानसभा उप चुनाव 2013 में भाजपा के सांवर लाल जाट ने कांग्रेस को भारी मतों से हराकर उसका किला छीन लिया था। कांग्रेस की इस जीत के मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट और अजमेर के नागरिकों के लिए कई मायने हैं। जिलेभर के कांग्रेसियों के लिए यह सीट संजीवनी का काम करेगी। एक बात और साफ हो गई कि जिले की राजनीति में गुर्जरों का वर्चस्व भी बना रहेगा।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सचिन पायलट दोनों के लिए यह विधानसभा सीट प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ था। पायलट ने इसे अपनी नाक का सवाल बताया था। वसुंधरा राजे के लिए यह हार चौंकाने वाली रही है। इस विधानसभा क्षेत्र में जातीय गणित के हिसाब से जाट बाहुल्य है। इससे यह माना जा रहा था कि सरिता गैना की जीत लगभग तय है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
वसुंधरा ने इस क्षेत्र में दो आमसभाएं की जो इस बात का दर्शाता है कि वे इस सीट को लेकर बहुत गंभीर थीं।
गुर्जर बाहुल्य गांवों में बीएसएफ की तैनाती और जाट बाहुल्य गांवों में सुरक्षा के ताम-झाम लगाना इस बात को दर्शाता है कि प्रशासनिक स्तर पर भी भाजपा की जीत का चक्रव्यूह बुना गया था। अजमेर की सभी आठों सीटों पर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सफाया होे गया था। ऐसे में विपक्ष की भूमिका को लेकर भी एक राजनीतिक शून्य पैदा हो गया था। विधानसभा में अजमेर जिले की बात कौन उठाएगा, यह संकट भी खड़ा हो गया था। ऐसे में रामनारायण गुर्जर की जीत इस शून्य को भरने का काम करेगी।
नसीराबाद विधानसभा उप चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को हराकर अपने गढ़ पर फिर से कब्जा कर लिया है। विधानसभा उप चुनाव 2013 में भाजपा के सांवर लाल जाट ने कांग्रेस को भारी मतों से हराकर उसका किला छीन लिया था। कांग्रेस की इस जीत के मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट और अजमेर के नागरिकों के लिए कई मायने हैं। जिलेभर के कांग्रेसियों के लिए यह सीट संजीवनी का काम करेगी। एक बात और साफ हो गई कि जिले की राजनीति में गुर्जरों का वर्चस्व भी बना रहेगा।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सचिन पायलट दोनों के लिए यह विधानसभा सीट प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ था। पायलट ने इसे अपनी नाक का सवाल बताया था। वसुंधरा राजे के लिए यह हार चौंकाने वाली रही है। इस विधानसभा क्षेत्र में जातीय गणित के हिसाब से जाट बाहुल्य है। इससे यह माना जा रहा था कि सरिता गैना की जीत लगभग तय है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

वसुंधरा ने इस क्षेत्र में दो आमसभाएं की जो इस बात का दर्शाता है कि वे इस सीट को लेकर बहुत गंभीर थीं। गुर्जर बाहुल्य गांवों में बीएसएफ की तैनाती और जाट बाहुल्य गांवों में सुरक्षा के ताम-झाम लगाना इस बात को दर्शाता है कि प्रशासनिक स्तर पर भी भाजपा की जीत का चक्रव्यूह बुना गया था। अजमेर की सभी आठों सीटों पर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सफाया होे गया था। ऐसे में विपक्ष की भूमिका को लेकर भी एक राजनीतिक शून्य पैदा हो गया था।

विधानसभा में अजमेर जिले की बात कौन उठाएगा, यह संकट भी खड़ा हो गया था। ऐसे में रामनारायण गुर्जर की जीत इस शून्य को भरने का काम करेगी।

श्रीनगर प्रधान के लिए होंगे उप चुनाव : उपचुनाव में जीत जाने की वजह से अब रामनारायण गुर्जर को श्रीनगर पंचायत समिति के प्रधान पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। ऐसे में अब श्रीनगर प्रधान के लिए उप चुनाव करवाना पड़ेगा।

पॉलिटेक्निक कॉलेज के बाहर परिणाम घोषित होते ही कांग्रेसियों में खुशी की लहर दौड़ गई।