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हिंदी मात्र हिंदी नहीं, यह हिंद की पहचान है
हिंदीसाहित्य परिषद द्वारा हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित काव्य गोष्ठी में कवयित्री बीना गर्ग ने कविता पढ़ी कि हिंदी मात्र हिंदी नहीं, यह हिंद की पहचान है। यह मीरा के भजन, खुसरों की पहली और मीर का कलाम है। कविता सुनाकर श्रोताओं कवियों-शायरों से जोड़ने की कोशिश की। परिषद के प्रचार मंत्री रोशनलाल परिहार के अनुसार मुख्य अतिथि जवाहर नवोदय विद्यालय के प्राचार्य एसके माहेश्वरी के स्वागत के पश्चात अध्यक्ष प्रवीण चंद गदिया ने राष्ट्रभाषा हिंदी का महत्त्व बताया। कवि शशि गुप्ता ने सरस्वती वंदना के साथ गोष्ठी का शुभारंभ किया। कवयित्री बीना गर्ग ने ही हिंदी की दुर्दशा का चिंतन करते हुए कहा कि राजभाषा हिंदी की क्या दुर्दशा हो रही है, बेचारी हिंदी एक कोने में पड़ी रो रही है। कवि रामावतार यादव सहर ने हिंदी की प्रशंसा में कहा कि जैसा कहते है वैसा लिखते है हिंदी में, अक्षर कैसे सुंदर दिखते है हिंदी में। शायर बेबस अजमेरी ने दहेज के लिए बढ़ती रहेगी तलखियां कब तक, जलाई जाएगी ससुराल में, बेटियां कब तक सुनाकर दहेज प्रथा पर गहरा कटाक्ष किया। कवयित्री शशि गुप्ता ने मां के प्रति भावनाएं प्रकट करते हुए कहा कि हमने सुना है नीलगगन पर कुदरत रहती है, लेकिन मां के पावों के नीचे जन्नत रहती है। कवि संजय मेहरा ने हिंदी छोड़ विदेशी को अच्छा जो बताए, उसे हिंदी के इस दुर्ग हिंदुस्तान से भगाईये सुनाकर श्रोताओं में जोश भरने की कोशिश की। गोष्ठी के अंत में मुख्य अतिथि माहेश्वरी ने हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करने और स्कूलों में हिंदी पखवाड़ा आयोजित करने की अपील की।