\"हर नगमे को नया साज दे रहा हूं...\'
शब्दोंसे शब्द मिले तो वातावरण में शब्दों की सुगंध फैल गई। जिस तरह एक शीशी से दूसरी में इत्र डालने पर सुगंध फैलती है, ठीक वैसे ही सोमवार शाम अजमेर में भी शब्दों की सुगंध ऐसी फैली कि हर कोई उसमें मदहोश हो गया। मौका था प्रसार भारती की ओर से जवाहर रंगमंच पर आयोजित महफिल-ए-मुशायरा का। शायरों ने शब्दों को जज्बातों में ढालते हुए शायरियां और गजलें पेश की। शुरुआत दूरदर्शन केंद्र, जयपुर के उप महानिदेशक कृष्णदेव कल्पित, शायर मन्नान राही आदि ने शमां रोशन कर की।
मुशायरे में टोंक के अरशद टोंकी ने \\\"निगाहों निगाहों में इशारे हुए, हम उनके हुए, वो हमारे हुए, खुदा जानता है, या मैं जानता हूं, वो अपनी जान से प्यारे हुए...\\\',जयपुर के बकुल देव ने \\\"दरख्तों पर हरा पत्ता ढूंढते हो, कहां गए हो क्या ढूंढ़ते हो, असर का तुम्हें भी नहीं है भरोसा, दुआ देकर अक्सर दवा ढूंढते हो...\\\', जयपुर के नरेंद्र भूषण ने \\\"ईश्वर-अल्लाह हमने उनको दिए नाम हैं, सभी के मालिक वही रहमान हैं, श्रीराम हैं\\\', बीकानेर के असद अली असद ने \\\"एक तरफ गीता यहां, एक तरफ कुरान है, इस वतन की खाक में देख लो यह वरदान है\\\', जयपुर के माहिर शैदाई ने \\\"जिंदगी के हर एक नगमे को नया साज दे रहा हूं, शेर कहना तो बहाना है, उसको आवाज दे रहा हूं\\\', जयपुर के अासिफ अमान ने \\\"जब गुजरते हैं वो राहों से महक आती हैं, बात करते हैं तो बातों से महकम आती है, ख्वाब में आते हैं पलभर के लिए वो, फिर महीनों भर राताें से महक आती है.., जोधपुर के फानी जोधपुरी ने...पत्थरों के जिस्म सारे, पत्थरों में ढल गए, मैं अकेला कांच की बरसात में चलता रहा...शेर पेश कर जमकर दाद ली। अजमेर के सुरेंद्र चतुर्वेदी ने... जिस को छू लूं मेरा हो जाता है, मुझको भी एक ऐसा जादू आता है, जितनी दरगाए सजदे करती है, तब जाकर रूहानी मौसम आता है..., इश्क में खुद से खुद को चुराना पड़ता है, खुद में रहकर वक्त बिताना पड़ता है... शायरी पेश की। जयपुर की मलका नसीम समेत अन्य शायरों ने भी शायरी एवं गजलें पेश की। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण डीडी राजस्थान पर किया गया।
कवि राजस्थान आज
प्रसार भारती की ओर से जवाहर रंगमंच पर आयोजित महफिल-ए-मुशायरा में मौजूद लोग दीप प्रज्जवलित करते अतिथि मंचासीन कवि।
कार्यक्रम सांस्कृतिक पड़ाव यात्रा के दूसरे दिन शाम 6.30 बजे से कविता राजस्थान कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। सम्म