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कैसा नो कंस्ट्रक्शन जोन... पालबीछला में बड़े पैमाने पर हो रहे कंस्ट्रक्शन
जमीनी हकीकत
जिम्मेदार कौन
नो कंस्ट्रक्शन जोन नगर निगम ने चिह्नित किए थे। निगम ने एक विशेष साधारण सभा पटेल इंडोर स्टेडियम में आयोजित की। हालांकि साधारण सभा नो कंस्ट्रक्शन जोन के खिलाफ थी। सरकार के प्रतिनिधि के रूप में सीईओ ने डिसेंट ऑर्डर लिया था। बाद में सरकार ने निगम की साधारण सभा के प्रस्ताव को खारिज करते हुए नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित किया। इस लिहाज से नगर निगम भी जिम्मेदार है।
यह तस्वीर है पाल बीछला की। हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने इस झील के भीतर और बाहर के हिस्से को नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित कर रखा है, लेकिन इन दिनों यहां बड़े पैमाने पर काम चल रहा है। तालाब की सदियों पुरानी पाल का दोहन किया जा रहा है। जिस तरह से काम हो रहा है, उससे साफ होता है कि पाल हटा कर पूरी जमीन समतल की जा रही है। मौके पर दो जेसीबी मशीनें, कई ट्रैक्टर ट्रालियां काम कर रही हैं। काफी बड़ा हिस्सा समतल किया भी जा चुका है। जाहिर है बाद में प्लॉट काटे जाएंगे। तालाब और आसपास के बड़े इलाके में नो कंस्ट्रक्शन जोन के बावजूद निर्माण कार्य जारी हैं। फोटो|मुकेशपरिहार
कलेक्टर
अब्दुल रहमान बनाम राज्य सरकार प्रकरण में हाईकोर्ट प्रदेश के नदी-नालों की 1947 से पूर्व की स्थिति बहाल करने का आदेश दे चुका है। सरकार कलेक्टर्स को पाबंद कर चुकी है। हाईकोर्ट द्वारा गठित एम्पावर्ड कमेटी अजमेर में कई दौरे कर चुकी है। अजमेर कलेक्टर से हाईकोर्ट ने कार्ययोजना मांगी थी, जिसमें पाल बीछला क्षेत्र को नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित करने की बात भी कही गई थी। बाद में सरकार ने नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित किया, राज्यपाल ने अधिसूचना जारी की। इस लिहाज से कलेक्टर की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा है।