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वार्ड पंच की अयोग्यता पर अंतरिम स्थगन आदेश

7 वर्ष पहले
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अजमेर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने अरांई ग्राम पंचायत के वार्ड पंच जालम पुत्र घीसा रेगर को दो से अधिक संतान के कारण अयोग्य घोषित किए जाने के संभागीय आयुक्त के आदेश पर अस्थाई स्थगन आदेश जारी किया है। वार्ड पंच की तरफ से अभिभाषक सत्य किशोर सक्सेना ने पैरवी करते हुए कहा कि प्रार्थी का निर्वाचन 2010 में हुआ।

संभागीय आयुक्त ने मार्च 12 में आरोप पत्र पर स्पष्टीकरण के निर्देश दिए थे। बीडीओ द्वारा जांच रिपोर्ट के अनुसार नर्स के बयानों के आधार पर बताया गया कि प्रार्थी के तीन संतान है। इसलिए वह वार्ड पंच के लिए अयोग्य घोषित हो चुका है। इस पर प्रार्थी ने जो स्पष्टीकरण जारी किया उसके अनुसार तीसरी संतान उसकी नहीं हो कर जतन लाल की है। इसके बाद संभागीय आयुक्त ने सीईओ को जांच अधिकारी नियुक्त किया। सीईओ की रिपोर्ट के अनुसार प्रार्थी के तीन संतान होना सिद्ध पाया गया। इसके आधार पर संभागीय आयुक्त ने फरवरी 13 में प्रार्थी को अयोग्य घोषित कर दिया। इस आदेश के खिलाफ दायर की गई पुनरीक्षण याचिका में राज्य सरकार ने पुन: जांच के आदेश जारी किए लेकिन अंतत: प्रार्थी को अयोग्य घोषित कर दिया गया। प्रार्थी के अभिभाषक का तर्क था कि उक्त जांच नैसर्गिक न्यायिक जांच के सिद्धांतों व विधि के प्रावधानों के प्रतिकूल होने से विधि विरुद्ध है। तर्कों से सहमत होते हुए न्यायाधीश रफीक मोहम्मद ने अंतरिम स्थगन आदेश जारी कर दिया।