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एमपी में मुश्किल हुई राजस्थान राेडवेज की राह

7 वर्ष पहले
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अजमेर। राजस्थान रोडवेज द्वारा मध्य प्रदेश में किराया बढ़ाए जाने के बाद इन मार्गों पर रोडवेज बसों की राह मुश्किल हो गई है। बसों का यात्रीभार घटकर आधा रह गया है, जबकि रोडवेज ने किराया अंतरराज्यीय करार के बाद बढ़ाया था। करार के बाद भी मध्यप्रदेश की प्राइवेट बसों में कम किराया लिया जा रहा है। इसका सीधा असर अजयमेरू आगार की उन बसों पर पड़ा है, जो मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों में संचालित होती है। जून 2014 में राजस्थान और मध्य प्रदेश के अंतरराज्यीय समझौते के बाद मध्य प्रदेश सीमा में एक्सप्रेस बसों के किराए में 7 पैसे प्रति किमी की बढ़ोतरी कर दी थी। किराया 90 से बढ़ाकर 97 पैसे प्रति किमी. कर दिया गया। इसके बाद से निकाले जा रहे रिव्यू में यह सामने आया कि इससे रोडवेज का यात्री भार आधा हो गया। लक्ष्य भी पूरे नहीं हो पा रहे। रोडवेज के चीफ मैनेजर अनिल पारीक ने रिव्यू निकाले जाने के बाद इस संबंध में मुख्यालय में हुई मीटिंग में मुद्दा रखा। मध्यप्रदेश सीमा में संचालित होने वाली रोडवेज बसों काे लेकर कार्रवाई के लिए सीएमडी भास्कर ए सावंत से आग्रह किया है।
40 रुपए में भरती है रोडवेज की बसें!

भास्कर ने एमपी रूट पर चलने वाले चालक एवं परिचालकों से बात की तो अजीबो गरीब स्थिति सामने आई। उन्होंने बताया कि कोटा तक तो सबकुछ ठीक रहता है। झालावाड़ के आगे से ही मध्य प्रदेश के बस स्टैंडों पर रोडवेज बसों काे खड़े होने तथा सवारियों को बैठने नहीं दिया जाता। कई जगह बसों को खड़े रहने के लिए गुंडागर्दी कर रहे लोगों को 40 रुपए देने पड़ते हैं। कई बाद मारपीट और मुकदमेबाजी भी इस मार्ग पर हो चुकी है।