पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Ajmer
  • कालवी ने कहा जातियों के आधार पर नहीं, जरूरतमंदों को ही मिले आरक्षण

कालवी ने कहा-जातियों के आधार पर नहीं, जरूरतमंदों को ही मिले आरक्षण

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
श्रीराजपूत करणी सेना के संरक्षक लोकेंद्र सिंह कालवी ने कहा कि जातियों के आधार पर आरक्षण के बजाए अब इसका लाभ जरूरतमंदों को मिलना चाहिए। सोमवार को होटल दाता इन में पत्रकारों से बातचीत में कालवी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की नागौर जिले में संपन्न हुई बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी आरक्षण मुद्दे की समीक्षा करने की बात कही थी। उन्होंने संघ की सराहना की और कहा यह सकारात्मक सोच है। राजनेताओं की दृढ़ इच्छा शक्ति के अभाव में ऐसा नहीं हो पा रहा है।

कालवी ने कहा कि वर्तमान में आरक्षण का लाभ वे जातियां ले रही हैं जो आर्थिक रूप एवं सामाजिक दृष्टि से संपन्न हैं। विशेष जातियां ही आजादी से बाद से आरक्षण का लाभ ले रही हैं। इसके बाद उनका पिछड़ापन दूर नहीं हुआ है। सरकार को यह जानना चाहिए कि आरक्षण का लाभ लेने के बाद भी उक्त जातियों के पिछड़ेपन के क्या कारण हैं। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि एक परिवार के सभी सदस्य आरक्षण का लाभ ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अन्य जाति के परिवार के एक भी सदस्य को नौकरी नहीं मिली पा रही है। नेता और सरकार आरक्षण की समीक्षा की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहे हैं। जिसकी वजह से आर्थिक विषमता बढ़ रही है। कालवी ने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा में आने के बाद भी उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का लाभ उनके बच्चों को महज 40 प्रतिशत अंकों के आधार मिल जाता है जबकि दूसरी और सामान्य जाति के गरीब बच्चे को 90 प्रतिशत अंक लाने के बाद भी प्रवेश नहीं मिलता है। अब समय गया है कि आरक्षण का लाभ आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए।

खून से लिखे इतिहास को नहीं मिटने देंगे काली स्याही से

कालवीने कहा कि राजस्थान का इतिहास खून से लिखा गया है। इसे काली स्याही के साथ नहीं मिटने देंगे। करणी सेना पद्मावती के नाम पर फिल्म बनाने के सख्त खिलाफ है। रानी पद्मावती ने आक्रमणकारी मुस्लिम शासक से बचने के लिए स्वयं को अग्नि को समर्पित कर दिया था। मुंबई में भंसाली से एक प्रतिनिधि मंडल मिला था। जिसमें उन्होंने आश्वासन दिया था कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं होगी। लेकिन उन्होंने इसके विपरीत काम किया। उन्होंने इतिहास या धर्म पर बनने वाली फिल्मों को रिलीज करने से पहले उसके हर पहलुओं की जांच कर लेनी चाहिए। कालवी ने सुझाव दिया कि प्री सेंसर बोर्ड बने। इस कमेटी में अध्यक्ष के साथ पत्रकार, इतिहासकार और जज होने चाहिए। ऐसी फिल्मों के बनने के बाद उसे सबसे पहले बुद्धिजीवियों को दिखाया जाना चाहिए। हमें निर्माता भंसाली के किसी भी वायदे पर भरोसा नहीं है। फिल्म बनने के बाद उसे पहले देखा जाएगा।

खबरें और भी हैं...