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कभी दवाओं की कमी तो कभी स्टाफ में तालमेल नहीं हालात नहीं बदले तो शहर खो देगा सुपरस्पेशलिस्ट

4 वर्ष पहले
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जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में इन दिनों हालात सही नहीं चल रहे हैं। नए अस्पताल अधीक्षक डॉ. विनय मल्होत्रा के आने के बाद आए दिन कोई कोई परेशानी उठ खड़ी हो रही है। कभी दवाओं की कमी, तो कभी सीटी स्कैन फिल्म या फिर एक्स रे फिल्म खत्म हो रही है। ऐसा लग रहा है कि विभागों में आपसी तालमेल रहा ही नहीं है।

इन सबका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ ही रहा है वहीं डॉ. मल्होत्रा को भी निराशा हाथ लग रही है। वे एक विजन के साथ अजमेर आए थे। कैसे अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी को बढ़ाया जा सकता, किस प्रकार मरीजों को बेहतर सुविधा प्रदान की जाए। इस पर वे काम शुरू करते इससे पहले उन्हें छोटी-छोटी समस्याओं में ही उलझाए रखा जा रहा है। जिस प्रकार की स्थितियां यहां बन रही है उससे ऐसा लगता है कि नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विनय मल्होत्रा अजमेर को अलविदा कह सकते हैं।

डॉ. मल्होत्रा ने हाल ही में अधीक्षक का पदभार संभाला है। मेडिकल कॉलेज स्तर पर उन्हें अब तक तो सहायक अधीक्षक दिए गए और ही उनके पास अलग से कोई टीम है। जो भी प्रशासनिक कार्य किए जाने हैं वे अकेले ही जूझ रहे हैं। उन्हें रोगियों या उनके परिजनों से ही पता चलता है कि अस्पताल में दवाओं की कमी चल रही है। उन्होंने यहां पर नेफ्रोलॉजी विभाग खोलने को लेकर प्रस्ताव तैयार कर मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. आरके गोखरू को भी दिया है। आरपीएससी से एक एपी नेफ्रोलॉजी भी मिल गया है, लेकिन अब तक नया विभाग खोलने को लेकर कॉलेज प्रशासन से हरी झंडी नहीं मिली है।

सबको साथ लाने का प्रयास

^सबकोसाथ लेकर चलेंगे। लेकिन छोटी-छोटी परेशानियों में उलझ जाने से इसका असर मिशन पर भी पड़ता है। सबका सहयोग मिलता तो बेहतर परिणाम सामने आएंगे। -डॉ. विनय मल्होत्रा, अधीक्षक, जेएलएन अस्पताल

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