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कोई बड़ा खरीदार नहीं आया, मात्र साढ़े तीन करोड़ में नीलाम कांजी हाउस की जमीन

4 वर्ष पहले
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अंजुमन से लिया एक तिहाई राशि का चेक

मंदीका असर नगर निगम की ओर से शुक्रवार को पुराने कांजी हाउस की बेशकीमती जमीन की नीलामी में भी देखने को मिला। नगर निगम ने शुक्रवार को गंज स्थित पुराने कांजी हाउस की नीलामी की। कोई बड़ा खरीदार सामने नहीं आने से सबसे ज्यादा बोली अंजुमन कमेटी ने तीन करोड़ 60 लाख रुपए लगाई। यह भूमि दरगाह क्षेत्र से काफी करीब है। अजमेर विकास प्राधिकरण ने इस क्षेत्र से करीब तीन किलोमीटर दूरी पर पुष्कर रोड स्थित हरिभाऊ उपाध्याय में 42 हजार रुपए प्रतिवर्ग गज आवासीय प्लॉट बेचा है। जितनी कीमत निगम प्रशासन को मिलनी चाहिए थी उतनी नहीं मिल पाई है। निगम ने एक चौथाई यानी 85 लाख रुपए का चेक प्राप्त कर लिया है। मेयर धर्मेंद्र गहलोत और आयुक्त हिमांशु गुप्ता इस पर विचार विमर्श करने के बाद अंतिम फैसला करेंगे। नगर निगम की संपत्ति पुराने कांजी हाउस की 992.83 वर्ग गज भूमि को ग्रुप हाउसिंग के लिए नीलाम किया गया। निगम की राजस्व अधिकारी रेखा जेसवानी ने बताया कि नजूल संपत्ति की आरक्षित दर वर्ष 2014 के अनुसार इस क्षेत्र के लिए 25 हजार रुपए तय की गई। बोली दाताओं से खुली बोली में हिस्सा लेने के लिए 3.72 लाख रुपए की अमानत राशि जमा करवाई गई। सात बोली दाताओं ने खुली बोली में हिस्सा लिया। यह बोली दोपहर 12 से प्रारंभ हुई जो शाम 4.30 बजे तक चली। अंजुमन कमेटी की ओर से अंतिम बोली 36 हजार सौ रुपए प्रतिवर्ग लगाई गई। इस बोली में निगम उपायुक्त प्रशासन ज्योति ककवानी, सीटीओ टीआर चौधरी, एक्सईएन ओमप्रकाश, डीएलआर एचआर सिरवी, कलेक्टर के प्रतिनिधि, एएओ अनिल मौजूद रहे।

ग्रुप हाउसिंग के लिए की गई है नीलाम

निगमस्तर पर पुराने कांजी हाउस की यह भूमि को ग्रुप हाउसिंग के लिए नीलाम की गई है। इस भूमि पर अन्य किसी प्रकार की गतिविधि नहीं की जा सकती है। इस भूमि पर बिल्डिंग बायलॉज लागू होगा। सेट बैक नियमानुसार छोड़ना होगा। नियमों के तहत ही निर्माण कार्य संबंधित पार्टी को करवाना होगा।

जनसुविधाओंका हो सकता है विस्तार

शहरके बीचों बीच बने पुराने कांजी हाउस की भूमि का जनहित में भी उपयोग संभव है। इस क्षेत्र में पार्किंग की सबसे अधिक समस्या है। जनहित को ध्यान में रखते हुए मल्टीस्टोरी पार्किंग विकसित की जा सकती है। इसके पीछे अहम वजह यह भी है कि उर्स के दौरान वाहन पार्क करने के लिए बाहर से आने वाले जायरीन को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

जेसवानी ने बताया कि सबसे अधिक बोली लगाने वाले अंजुमन कमेटी से मौके पर एक तिहाई राशि का चेक ले लिया गया है। उपायुक्त तक यह फाइल पहुंच गई है। इसके बाद यह फाइल आयुक्त से होते हुए अंतिम निर्णय के लिए मेयर धर्मेंद्र गहलोत के पास जाएगी। इसके बाद मेयर एवं आयुक्त विचार विमर्श करेंगे। यदि उक्त बोली से वे संतुष्ट रहते हैं तो अंजुमन कमेटी को मांग पत्र दे दिया जाएगा। कमेटी को 30 दिन के भीतर शेष राशि जमा करवानी होगी।

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