बड़गांव रेलवे फाटक से अब गुजर सकेंगे केवल 2.5 मीटर ऊंचे वाहन
रेलवे फाटक की कम की गई चौड़ाई ऊंचाई।
यह निकला बीच का रास्ता
रेलवेने तीसरा रास्ता चुना। पहले जो क्रॉसिंग की चौड़ाई चार लेन में थी, उसे कम कर अब दो लेन में ही कर दिया गया है। इसके साथ सर्विस रोड पर ढाई मीटर ऊंचाई के बैरिकेड लगा दिए हैं। बैरिकेड लगने के बाद अब रेलवे फाटक तो रहेगा, लेकिन इससे केवल उन्हीं वाहनों की आवाजाही हो सकेगी, जिनकी ऊंचाई ढाई मीटर से कम है। बस, ट्रक, ट्रेलर अधिक ऊंचाई वाले वाहनों को अब ओवरब्रिज से ही गुजरना होगा।
आरयूबी भी संभव नहीं
असलमें रेल प्रशासन इस रेलवे क्रॉसिंग को बंद करने के ही पक्ष में रहा। ग्रामीण इस पर सहमत हो गए कि रेलवे क्रॉसिंग को हटाया जाता है तो उनके लिए एक अंडरपास इसी स्थान पर बना दिया जाए। इसके चलते 3 सितंबर 13 को जिला प्रशासन, एनएचएआई, रेल प्रशासन तथा फाटक बंद करने का विरोध कर रही पैराफेरी संघर्ष समिति के नेताओं के बीच बैठक हुई और अंडरपास बनाने पर सहमति बनी। यह फैसला भी हुआ कि अंडरपास बनाने पर जो लागत आएगी, उसका वहन अजमेर विकास प्राधिकरण करेगा। इस फैसले को हुए ढाई साल बीत गए, पिछले दिनों रेलवे तथा एडीए के अफसरों ने अंडरपास निकालने की संभावना के मद्देनजर सर्वे भी किया, लेकिन यह पाया कि तकनीकी रूप से इस स्थान पर अंडरपास निकालना संभव नहीं है।
ग्रामीणों का था विरोध ओवरब्रिज निकलने पर बंद नहीं होना चाहिए फाटक
रेलवेक्रॉसिंग हटाने को लेकर कलेक्टर के स्तर पर जारी अनापत्ति का फाटक के पार बसे बड़गांव, हटूंडी खाजपुरा के ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि मूल रूप से यह फाटक गांवों के लोगों की आवाजाही के लिए ही बनाया गया था, जो वर्तमान जगह से सौ मीटर दूर माखूपुरा की तरफ स्थित था। वर्ष 1984 में जब राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए इस बाइपास का निर्माण हुआ तो बिना पंचायत की इजाजत के ही इसे हटाकर मौजूदा स्थान पर बना दिया गया। ओवरब्रिज निकलने पर इसे बंद किया जाता है तो 50 हजार से अधिक ग्रामीणों के सामने मुसीबत खड़ी हो जाएगी। वर्तमान में जो ग्रामीण केवल एक सौ मीटर की दूरी तय कर शहर की सीमा में जाते हैं, उन्हें फाटक बंद होने पर शहर आने के लिए पांच किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी।
प्रशासनने निर्णय वापस लिया
ग्रामीणोंने रेल मार्ग को बंद करने की चेतावनी दे डाली। मामला तत्कालीन केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद सचिन पायलट तक पहुंच गया। पायलट के दखल के चलते कलेक्टर ने पूर्व में जारी अनापत्ति में संशोधन करते हुए इस आशय के आदेश जारी किए कि रेलवे फाटक को इसके मूल स्थान पर या सर्विस रोड पर स्थापित किया जाता है तो कोई आपत्ति नहीं है। तब से अब तक रेलवे फाटक को लेकर कोई निर्णय नहीं हो सका है।
सिटी रिपोर्टर|अजमेर
बड़गांवतक जाने के लिए अब तो अंडरपास का निर्माण होगा और ही रेलवे फाटक को हटाया जाएगा। रेलवे फाटक यथावत रहेगा। तब्दीली हुई है तो इतनी कि फाटक की चौड़ाई के साथ ऊंचाई भी कम कर दी गई है। इसके चलते इस फाटक से केवल 2.5 मीटर ऊंचे वाहनों की ही आवाजाही हो सकेगी।
रेलवे जिला प्रशासन 7 साल गुजर जाने के बाद भी इसे बंद करने के मामले में कोई निर्णय नहीं ले सका है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही के मद्देनजर ओवरब्रिज का निर्माण हो जाने पर रेलवे द्वारा इस क्रॉसिंग को बंद किया जाना प्रस्तावित था। इसके लिए तत्कालीन कलेक्टर ने सितंबर 09 में इस संबंध में अनापत्ति भी जारी कर दी थी, जिसमें कहा गया कि ओवरब्रिज का काम पूरा हो जाने के बाद फाटक को बंद किया जा सकेगा।
^रेलवेफाटक को बंद करना उचित नहीं था, ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए ही इसका विरोध हुआ। अंडरपास के लिए सहमति बनी, लेकिन तकनीकी रूप से संभव नहीं होने पर यह रास्ता निकाला गया, जिसके तहत ढाई मीटर की ऊंचाई वाले वाहनों के गुजरने की व्यवस्था है। फिलहाल ग्रामीण इससे संतुष्ट हैं। -घनश्याम जांगिड़, पूर्वअध्यक्ष, श्रीनगर पंचायत समिति सरपंच संघ