कांग्रेस से ज्यादा भाजपा पार्षदों ने ही तीखे लहजे में उठाए सवाल
डिप्टी मेयर संपत सांखला ने कहा कि संपत्ति कर (नगरीय विकास कर) वसूली अभियान में तेजी लाई जानी चाहिए। बजट में मात्र 5 करोड़ वसूली का प्रावधान रखा गया है, जबकि इसे 20 से 30 करोड़ रुपए करना चाहिए। शहर में निजी स्कूल, निजी अस्पताल और नर्सिंग होम हैं, जिनसे वसूली की जानी चाहिए। सांखला ने पट्टे पर दी गई भूमियों के किराया में गत वर्ष की तुलना में इस बार 20 लाख रुपए की कटौती कर दी गई है, जो गलत है। उन्होंने अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 के प्रावधानों के उल्लंघन से समझौता अधिसंधान में 50 प्रतिशत कटौती कर निगम की आय कम करने का प्रयास किया गया है। इसी प्रकार सीवरेज लाइन कनेक्शन पर एक करोड़ का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने कहा कि शहर के सभी 60 वार्डों में प्रयास किए जाएं कि जल्द से जल्द कनेक्शन देते हुए निगम की आय में बढ़ोतरी की जानी चाहिए। बजट में इस बार सड़क, नाले विशेष अनुदान पर बजट नहीं रखने पर अधिकारियों की आलोचना की, जबकि वित्तीय वर्ष 2015-16 में 5 करोड़ का प्रावधान था। ऐसे में विकास कार्य कैसे संभव होंगे। सांखला ने सुझाव दिया कि निगम आय बढ़ोतरी में शिथिलता बरतने वाले अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए। सांखला ने कहा कि हृदय, स्मार्ट सिटी और अमृत योजना का केंद्र से आने वाला पैसा समय पर आना चाहिए। यदि पैसा समय पर जाता है तो शहर का विकास किया जा सकता है।
नगर निगम की साधारण सभा में कुछ इस तरह से देखते रहे शेखावत और मेयर गहलोत। यह भी काफी चर्चा में रहा।