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110 दिन बाद भी नहीं खुल सका आनंदपाल की फरारी का रहस्य

5 वर्ष पहले
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फायरिंगकर पुलिस हिरासत से भागे अपराधी आनंदपाल की फरारी का रहस्य 60 दिन में खोलने का दावा करने वाली सरकार 110 दिन के बाद भी जांच पूरी नहीं कर पाई है। जबकि दिसंबर में ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इधर, प्रशासनिक जांच का जिम्मा संभाल रहे प्रमुख सचिव चार बार जांच अवधि बढ़वा चुके हैं और सरकार भी बिना किसी सवाल-जवाब के समय बढ़ाए जा रही है। सवाल है आखिर सरकार किस दबाव में है। चर्चा है कि कैबिनेट स्तर के एक मंत्री जांच को लंबित रखना चाहते हैं। ये मंत्री आनंदपाल से रिश्तों को लेकर पहले भी विवादों में रहे हैं। विधानसभा में उन पर आरोप लग चुका है कि वे जेल में आनंदपाल से मिले थे। उसके बाद आनंदपाल पुलिस कस्टडी से भाग गया। जांच रिपोर्ट नहीं आने के पीछे 29 फरवरी से शुरू हो रहा बजट सत्र भी बताया जा रहा है। इस मामले में पुलिस मिलीभगत का खुलासा हो चुका है। सरकार नहीं चाहती है कि रिपोर्ट से सदन के अंदर-बाहर, उसे विपक्ष निशाने पर ले।

प्रशासनिक जांच क्यों

पूरेमामले में जेल एवं पुलिस सीधे तौर जिम्मेदार थे। वह अजमेर की हाई सिक्युरिटी जेल में बंद था। वहीं, अजमेर पुलिस लाइन की गार्ड पेशी पर नागौर ले गई थी। साजिश जेल में रची गई या गार्ड या फिर कोई और कारण रहे। जेल एवं पुलिस विभाग, लापरवाही का जिम्मा एक-दूसरे पर नहीं डालें, सो..प्रशासनिक जांच कराने का निर्णय किया गया था।

>4 सितंबर को नागौर जिले के परबतसर क्षेत्र से आनंदपाल सिंह पुलिस अभिरक्षा से फरार हुआ।

>11 सितंबर को सीएम के निर्देश पर गृह मंत्री ने प्रमुख सचिव दीपक उप्रेती को प्रशासनिक जांच सौंपी।

>60 दिन का समय यानी 11 नवंबर को रिपोर्ट देनी थी।

>चार बार कार्यकाल बढ़ाया। पहली बार 30 दिन, दूसरी बार 15 दिन। फिर 15 दिन और अब 30 दिन यानी 28 फरवरी तक के लिए बढ़ा दिया।

खान पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख सचिव दीपक उप्रेती को 11 नवंबर को रिपोर्ट सौंपनी थी। लेकिन, उन्होंने गृह विभाग से 11 दिसंबर तक का समय मांगा। पर रिपोर्ट मिली नहीं। 24 जनवरी को रिपोर्ट सौंपने की बात कही, लेकिन कार्यकाल फिर 28 फरवरी तक बढ़ावा लिया। भास्कर ने उनसे पूरे मामले में बात की.....।

आनंदपाल प्रकरण की रिपोर्ट में इतना वक्त लगा, कोई खास वजह ?

उप्रेती: मैंएक-एक दिन में सौ-सौ लोगों से मिला। जोधपुर का प्रभारी हूं। जब-जब वहां गया, रास्ते में लोगों से मिला। मौका देखा। अजमेर में लोगों से मिला। बहुत कुछ तथ्य एवं जानकारियां मिली है। देरी की वजह कोई और नहीं है। मेरे पास दो प्रमुख विभागों का काम-काज था। अब थोड़ी राहत मिली है। जल्द रिपोर्ट दे देंगे।

चर्चाहै कि रिपोर्ट में पुलिस एवं जेल की विफलता पर तीखी टिप्पणी की है, सरकार इसे थोड़ा हल्का करने की कह रही है?

उप्रेती: सच्चाईछिप नहीं सकती। और मैं तो कतई नहीं। मेरा कोई भी स्क्रिप्ट नहीं बदलवा सकता। यह सौ फीसदी गलत है। मैं झूठ लिखूंगा, तो कोई भी पोल खोल देगा। इंतजार कीजिए, जब भी रिपोर्ट आएगी। सत्य आएगी।

क्या28 फरवरी तक रिपोर्ट सौंप देंगे ?

उप्रेती: एकविभाग हटने से काम कम हुआ है। वैसे भी जांच के तीन पार्ट हैं। दो जेल सुधार से संबंधित है। मैं जल्दबाजी में कोई रिपोर्ट नहीं देना चाहता, जिसके सुझाव ही लागू नहीं हो पाए।

उप्रेती को जांच सौंपी गई थी तब वे सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव थे। प्रमुख सचिव अशोक सिंघवी के पकड़े जाने के बाद खान एवं पेट्रोलियम विभाग और स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड उदयपुर के चेयरमैन का चार्ज भी सौंप दिया गया। कार्यकाल बढ़ाने के पीछे उन्होंने हवाला दिया कि काम की व्यस्तता से रिपोर्ट फाइल नहीं कर पा रहे हैं।

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