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पटवारी और बाबुओं के तबादलों में भी दखल रखना चाहते हैं मंत्री

5 वर्ष पहले
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तहसीलदारसे लेकर पटवारी तक के तबादलों में राजस्व मंत्री अमराराम के निर्देशों को लेकर राजस्व मंडल प्रशासन असमंजस में है। जो तबादला आदेश राजस्व मंडल की ओर से होते रहे हैं, उनमें अब राजस्व मंत्री के निर्देश से किस तरह बदलाव किया जाए, यह प्रशासन की समझ में नहीं रहा है। तहसीलदारों और उप पंजीयकों के साथ ही पटवारी गिरदावरों सहित राजस्व विभाग में कार्यरत बाबुओं के अंतरसंभागीय तबादलों में भी राजस्व मंत्री ने दखल दे दिया है। यही वजह है कि राजस्व मंडल में सैकडों की संख्या में लंबित तबादला आवेदन पर फैसला नहीं हाे पा रहा है।

हाल ही राजस्व विभाग की संयुक्त सचिव दुर्गा जोशी ने राजस्व मंडल को पत्र भेजकर राजस्व मंत्री के निर्देशों से अवगत कराया था। इसके अनुसार राजस्व मंत्री अमराराम चाहते हैं कि तहसीलदारों और उप पंजीयकों के तबादलों से पहले राजस्व विभाग से अनुमोदन कराना चाहिए। राजस्थान सेवा नियमों का हवाला देते हुए कहा गया था कि प्रशासनिक विभाग को इन तबादलों का अधिकार है यानी तहसीलदारों और उप पंजीयकों के तबादलों में मंत्री अमराराम विभाग के जरिये अपना दखल रखना चाहते हैं, जबकि राजस्व मंडल ही अब तक तबादले करता आया है। यह तो तहसीलदार और उप पंजीयक की बात थी लेकिन पटवारी और बाबुओं के तबादलों में भी यही स्थिति है।

मंडल प्रशासन सूत्रों के अनुसार पटवारी, गिरदावर और राजस्व विभाग के कुछ बाबुओं के अंतर संभागीय और अंतर जिला तबादलों का क्षेत्राधिकार राजस्व मंडल को है, लेकिन इस संवर्ग के तबादलों के लिए भी राजस्व विभाग से अनुमोदन के लिए निर्देश जारी कर दिए गए। राजस्व विभाग ने राजस्व मंत्री के निर्देशों की पालना में पटवारी गिरदावरों के तबादला आदेश से पूर्व अनुमोदन का जो आदेश दिया है, उसका असर यह हा़े रहा है कि मंडल में ऐसे पटवारी और गिरदावरों सहित बाबुओं के तबादले के लिए दिए गए आवेदनों का ढेर लग गया है।

सैकड़ों की संख्या में तबादला आवेदनों पर निर्णय नहीं हो पा रहा है। अब राजस्व मंडल में नव नियुक्त अध्यक्ष अशोक शेखर के समक्ष यह मुद्दा रखा जाएगा।

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