अब बन सकते हैं आप लीज होल्डर की बजाए मालिक, फ्री होल्ड के नए प्रावधान

4 वर्ष पहले
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अजमेर. अगर आपने अजमेर विकास प्राधिकरण से जमीन ले रखी है और आप उसके हमेशा के लिए मालिक (फ्री होल्ड) बनना चाहते हैं तो इसकी राह खुल गई है। प्राधिकरण से जमीन नीलामी में ली हो या लॉटरी के जरिए आपको आवंटित हुई हो उसको फ्री होल्ड में तब्दील किया जा सकता है। एक साल पहले फ्री होल्ड संबंधी कानून लागू होने के बाद अब सरकार ने फ्री होल्ड के लिए डीड का प्रोफॉर्मा जारी कर दिया है। आप इस फॉर्मेट में आवेदन कर हमेशा के लिए लीज के झंझटों से छुटकारा पाकर लीज होल्डर की जगह संपत्ति के पूर्ण मालिक बन सकते हैं।

अपनी ही संपत्ति पर किराएदार की हैसियत रखने वाले प्लॉट मालिकों को जिस कानून का इंतजार था, वह करीब एक साल पहले बनकर लागू हो गया था। लेकिन अफसरशाही की उदासीनता, लापरवाही और नकारात्मक रवैए के चलते इस पर प्रभावी  अमल नहीं हो पाया। यूआईटी एक्ट के तहत बने लैंड डिस्पोजल रूल्स में संशोधन करते प्रदेश के तीनों विकास प्राधिकरण   सहित सभी यूआईटी को फ्री होल्ड की डीड का फॉर्मेट तैयार कर उसे नगरीय विकास विभाग से अप्रूव करवाने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन लंबे समय तक तो फ्री होल्ड का नया कानून फाइलों में ही दफन रहा। भास्कर ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए इसे उजागर किया। इसके बाद प्राधिकरण सहित निकायों ने नए कानून की सुध ली, लेकिन फ्री होल्ड डीड का फॉर्मेट तैयार नहीं कर पाए। आखिर सरकार ने खुद ही फॉर्मेट तैयार कर सभी प्राधिकरण और यूआईटी को भिजवा दिया है। इसके साथ ही इसे गजट नोटिफाइड भी करवाया जा रहा है ताकि डीड की एकरूपता बनी रहे।
 
 
फ्री होल्ड के नए प्रावधान 
राजस्थान नगर सुधार न्यास अधिनियम के तहत नगर सुधार न्यास, नगरीय भूमि का निष्पादन नियम 1974 बने हुए हैं। इन नियमों के अनुसार ही स्थानीय निकाय अपनी जमीनों का आवंटन व नीलामी आदि की प्रक्रिया पूरी करते हैं। इन नियमों में संशोधन कर फ्री होल्ड का नया कानून लाया गया है।
 
खास बात
1. लीज होल्ड से फ्री होल्ड में तब्दील करने और फ्री होल्ड बेस पर भी जमीनों के आवंटन व नीलामी के लिए भूमि निष्पादन नियम 1974 में संशोधन करते हुए 13 अप्रैल 2016 को नगर सुधार न्यास, भूमि का निष्पादन, संशोधित नियम 2016 लागू किए गए।
2. नए संशोधित नियमों के तहत पुराने नियम के नियम 3 की जगह नया नियम 3 प्रतिस्थापित किया गया है। इसमें फ्री होल्ड के लिए दरें भी तय कर दी हैं।
 
गजट नोटिफाइड... ताकि डीड की बनी रहे एकरूपता 
यह रखी गई है दर 
- किसी ने लीज होल्ड बेस पर स्थानीय निकास से संपत्ति ली है और एकबारीय शहरी जमाबंदी जमा नहीं कराई है तो उसे लीज मनी की सवा व डेढ़ गुना राशि जमा कराने पर फ्री होल्ड में तब्दील किया जा सकता है।
- अगर किसी ने वन टाइम शहरी जमाबंदी जमा कराई हुई है तो आवासीय भूखंड के मामले में वन टाइम शहरी जमाबंदी का 25 प्रतिशत और व्यावसायिक भूखंड के मामले में 50 प्रतिशत राशि जमा कराने पर फ्री होल्ड में तब्दील किया जा सकता है।
- लीज होल्ड प्रोपर्टी को फ्री होल्ड में तभी तब्दील किया जा सकता है, जबकि उससे जुड़े सभी बकाया शुल्क जमा करा दिए जाएंगे।
- लीज होल्ड से फ्री होल्ड में तब्दीली के लिए बनाए गए फार्मेट में आवेदन के बाद  राज्य सरकार द्वारा तय की गई स्टांप डयूटी पर निष्पादित की जाएगी।
- आवासीय व वाणिज्यिक के अलावा कुछ मामलों में लीज होल्ड से फ्री होल्ड में तब्दीली पर रोक भी लगाई गई है, लेकिन राज्य व केंद्र सरकार के लंबे चलने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए फ्री होल्ड बेस पर जमीन दी जा सकती है।
 
‘भास्कर’ ने उठाया था मुद्दा
लीज होल्ड प्रोपर्टी को लेकर होने वाली परेशानी और स्थानीय निकायों पर काम के बोझ को लेकर भास्कर ने समाचार प्रकाशित किया था। आमजन को किस तरह स्थानीय निकाय नीलामी में बेचान के नाम पर काफी महंगे दामों पर प्लॉट लीज पर देते हैं, जबकि वास्तविकता में निकाय प्लॉट बेचते नहीं है, बल्कि किराए यानी लीज पर सौंपते हैं। लीज खत्म होने पर संपत्ति वापस लेने का स्थानीय निकाय को अधिकार होता है जो संपत्ति लेने वाला खुद पट्टा लेते समय स्वीकार करता है। भास्कर ने लीज प्रोपर्टी के नुकसान बताते हुए आमजन को राहत पहुंचाने के लिए फ्री होल्ड का कंसेप्ट तत्काल लागू करने की जरूरत बताई थी और यह भी बताया था कि दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में फ्री होल्ड के नियम लागू हो चुके हैं। 
 
यह होगा फायदा
- आपकी जो प्रोपर्टी अब तक लीज यानी किराए पर थी, उसके आप शाश्वत रूप से मालिक बन जाते हैं।
-फ्री होल्ड होने पर स्थानीय निकाय का संपत्ति में दखल न के बराबर हो जाता है।
-आपको संपत्ति बेचने व हस्तांतरण के लिए निकाय से मंजूरी की जरूरत नहीं है।
- 99 साल बाद संपत्ति आपकी नहीं रहेगी, इस चिंता से आप मुक्त हो जाएंगे।
-स्थानीय निकायों को इससे करोड़ों रुपए की आय होगी। लीज की फाइलें संधारित करनी पड़ती है और उस पर निकायों की बड़ी शक्ति खर्च हो जाती है, उसकी बचत हो सकती थी।
 
सरकार ने देरी से ही सही फ्री होल्ड के लिए फॉर्मेट बना दिया है। अब प्राधिकरण की जिम्मेदारी है कि फ्री होल्ड के लिए अलग से सेक्शन खोले और इसके साथ ही जिस तरह नीलामी में भूखंड बेचने का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाता है, उसी तरह फ्री होल्ड के लिए भी आमजन तक जानकारी पहुंचाई जाए। इससे एडीए को भी फायदा होगा और आमजन को राहत मिलेगी। 
-रमेश सैनानी
अध्यक्ष, अजमेर प्रोपर्टी डीलर्स एंड   बिल्डर्स एसोसिएशन 
 
 
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