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सरहद पार से आए 2000 के नकली नोट, पहली बार मशीन से छपी नई करंसी पकड़ी

4 वर्ष पहले
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अजमेर.   क्लॉक टॉवर थाना पुलिस ने बिहार के चार युवकों को 84000 हजार रुपए के नकली नोटों के साथ मंगलवार को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से बरामद नकली नोट दो-दो हजार के हैं। प्रारंभिक पूछताछ में ये नकली नोट सरहद पार यानी पाकिस्तान और बांग्लादेश से आना सामने आया है। खास बात यह है कि अब तक तो नई करेंसी स्कैनर या फोटोकॉपी से ही नकली बनाई जा रही थी, लेकिन ये नोट मशीन से छपे हैं, जो हूबहू असली जैसे ही प्रतीत होते हैं। चारों आरोपी दो दिन से अजमेर में डेरा जमाए हुए थे। 
 
केसरगंज चौकी प्रभारी एएसआई राजाराम  को मिली मुखबिर की सूचना पर पुलिस दल  ने आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ लिया। दरअसल चारों युवक 2000 रुपए देकर दुकानदारों से कम कीमत का सामान लेते और बदले में असली रकम जमा कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक 16 हजार के नकली नोट चला चुके हैं। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों  में मोहम्मद जसीम अंसारी, मोहम्मद आफताब आलम, मोहम्मद सौहेल आलम और समरज आलम बिहारी गंज, बिहार के निवासी हैं।   
 
नए नोट जारी होने के बाद पहली बार नकली नोटों की खेप पकड़ी   
नोटबंदी के बाद जारी किए गए दो-दो हजार रुपए के नए नोट की डुप्लीकेट खेप संभवतया देश में पहली बार अजमेर में पकड़ी गई है। इससे खुलासा हो गया है कि भारत में प्रचलित नई करेंसी की भी नकल छापने के कारखाने खुले हुए हैं। आईबी के सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान और बांग्लादेश से नकली नोटों की खेप नेपाल और पश्चिम बंगाल के रास्ते देश में भेजी जा रही है। आरोपियों ने बयान दिया है कि देशभर में लाखों रुपए के नकली नोट बाजार में खपाए जा चुके हैं। इस तथ्य के उजागर होने के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। पकड़े गए लोगों के नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। आईबी के दल ने अजमेर में आरोपियों से गहनता से पूछताछ की है।   
  
प्रिंटिंग मशीन से छापे गए नकली नोट, पहले पकड़ी थी स्केनर की कॉपियां   
चौंकाने वाला तथ्य यह है कि नोटबंदी का मुख्य उद्देश्य सरकार का यह था कि  आतंकियों को काला धन के माध्यम से हो रही फंडिंग रोकी जाएगी और सरहद पार से आ रहे नकली नोटों की खेप से देश को हो रहे आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा, लेकिन जिला पुलिस की गिरफ्त में फंसे नकली नोट चलाने वाले गिरोह के बयान पर अगर भरोसा किया जाए तो सरहद  पार अभी भी भारतीय करेंसी की डुप्लीकेट छापने वाले प्रिंटिंग कारखाने काम कर रहे हैं।
 
नोटबंदी के बाद अजमेर में पहली बार प्रिंटिंग मशीन से छपे दो हजार के नकली नोट की खेप पकड़ी गई है। पूर्व में केसरगंज चौकी प्रभारी राजाराम ने स्कैनर और फोटो कॉपी मशीन के जरिए नकली नोट बनाकर बाजार में चलाने वाले स्थानीय गिरोह को पकड़ा था। यह गिरोह भी पांच साल से पचास और सौ रुपए के नोट की कलर फोटो कॉपी कर बाजार में चला रहा था।  
 
आईबी और पुलिस करेगी गिरोह के नेटवर्क की तफ्तीश   
पुलिस के अनुसार आईबी ने नकली नोट की खेप के साथ पकड़े गए लोगों से गहनता से पूछताछ की है। बिहार पुलिस से इनके नाम-पतों की तस्दीक भी कराई गई है। जिला पुलिस की टीम बिहार जांच के लिए भेजी गई है।
  
सरगना छह दिन और अन्य आरोपी दो दिन के रिमांड पर   
मामले की जांच कोतवाली थाना पुलिस कर रही है। नकली नोट गिरोह के मास्टर माइंड यासीन को अदालत ने 6 दिन के रिमांड पर दिया है, जबकि अन्य आरोपियों को 2 दिन के रिमांड पर लिया गया है। आरोपियों को पकड़ने वाले पुलिस दल में पुलिस कर्मी रामबाबू, सुभाष, सूर्यप्रकाश, जगदीश और अन्य थाना स्टाफ शामिल था। टीम के सदस्यों ने सूचना मिलने के बाद ऑटो ड्राइवर के वेश में आरोपियों की रैकी की थी और उन्हें रंगे हाथ नकली नोट चलाते पकड़ा था।
 
बिहार में पीर मोहम्मद है नकली नोटों का बड़ा डीलर 
पुलिस गिरफ्त में फंसे नकली नोट के सौदागरों का मास्टरमाइंड  मोहम्मद यासीन  अंसारी पुत्र मोहम्मद नईम अंसारी मंजोरा बाजार थाना बिहारीगंज जिला मधेपुरा बिहार का रहने वाला है। उसने खुलासा किया है पाकिस्तान और बांग्लादेश से नेपाल और पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत में नकली नोटों की खेप पहुंच रही है। बिहार मधेपुरा में नकली नोटों का मुख्य डीलर उसका ससुर पीर मोहम्मद है।
 
पीर मोहम्मद ने नकली नोट देश के विभिन्न शहरों में खपाने के लिए एजेंट बना लिए हैं। एजेंटों को नकली नोट चलाने के एवज में 50 फीसदी राशि दी जाती है, जबकि एजेंटों ने अपने स्तर पर नकली नोट चलाने वालों को वेतन पर भर्ती कर लिया है। यासीन के साथ पकड़े गए आरोपी मोहम्मद आफताब आलम, मोहम्मद सोहल आलम और समरज आलम वेतन पर नकली नोट खपाने का काम कर रहे थे। 
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