अजमेर। ख्वाजा साहब की दरगाह में आने वाले जायरीन की तादाद और रास्तों में भीड़भाड़ से आए दिन होने वाले जाम को देखते हुए दरगाह क्षेत्र की सड़कें 60 फीट चौड़ी होंगी। दरगाह कॉरिडोर और दरगाह क्षेत्र के विकास पर 150 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
नसीराबाद में भी पहली बार नगरपालिका का गठन किया जा सकता है। इन दो महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर मुख्य सचिव शनिवार को सचिवालय में बैठक लेंगे। इसमें जिला कलेक्टर समेत आला अधिकारी भाग लेंगे। बैठक में इन मुद्दों पर गहनता से विचार विमर्श कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक महावीर सर्किल से निजामगेट और निजाम गेट से सोलह थंबा, ढाई दिन का झोपड़ा समेत अन्य मुख्य मार्ग की सड़कें 60 फीट चौड़ा करने की योजना है। दरगाह कॉरिडोर के नाम से इस योजना का खाका तैयार कर लिया गया है। दरगाह क्षेत्र से जुड़ने वाले प्रमुख काफी संकरे हैं। धानमंडी क्षेत्र में वाहन खड़े रहते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है। आगजनी व हादसे की स्थिति में अग्निशमन के वाहन अंदर तक नहीं जा सकते हैं। इन्हीं परेशानियों एवं जायरीन की सुविधा को देखते हुए मार्ग चौड़ा करने का निर्णय लिया गया है।
नसीराबाद में नगरपालिका की इसलिए है आवश्यकता
नसीराबाद में वर्तमान में कैंटोनमेंट बोर्ड होने के कारण शहर का विकास अवरुद्ध हो गया है। इसको देखते हुए नगरपालिका का गठन हो सकता है। यहां पर हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनी भी है। नसीराबाद के उपखंड अधिकारी ने नगरपालिका को लेकर पूरा प्रस्ताव तैयार कर लिया है। एजेंडे में उल्लेख किया गया है कि 1818 में नसीराबाद छावनी की स्थापना हुई थी। यहां पर द्वितीय श्रेणी का छावनी बोर्ड में कुल 14 सदस्य हैं, जिसमें से 8 निर्वाचित सदस्य होते हैं। वर्ष 2011 में नसीराबाद छावनी की जनसंख्या 50804 है। 50 हजार से अधिक जनसंख्या होने से छावनी बोर्ड की संरचना हाल ही में परिवर्तित हुई है।वर्तमान में स्थानीय छावनी बोर्ड विभिन्न नागरिक सुविधाओं, विकास कार्य के संबंध में बजट व संसाधनों के अभाव से से गुजर रहा है। छावनी बोर्ड पर राज्य सरकार का नियंत्रण नहीं होने से राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ यहां आम जनता को नहीं मिल पाता है। अन्य कस्बों की तरह यहां पर अग्निशमन केंद्र भी नहीं हैं। नसीराबाद कस्बे में छावनी परिषद है।