अजमेर। शहर में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के लिए राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से पिछले साल अगस्त में पारित फैसले के दिशा निर्देशों पर नगर निगम छह माह बाद भी पालना नहीं करा पाया है। नगर निगम के इस रवैये व हाईकोर्ट के आदेश की पालना नहीं करने का आरोप लगाते हुए चंद्रवरदाई नगर निवासी रवि नरचल ने अब मेयर धर्मेंद्र गहलोत सहित डिप्टी कमिश्नर सीमा शर्मा, आरओ प्रकाश डूडी और नगरीय विकास विभाग के प्रमुख शासन सचिव परमजीत सिंह के खिलाफ अवमानना याचिका पेश कर दी है।
यह प्रकरण फिलहाल दर्ज होने की प्रक्रिया में है। आराेप है कि उक्त फैसले के दिशा निर्देशों काे अपने हिसाब से तोड़ मरोड़कर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है तो कुछ को तोड़फोड़ की कार्रवाई का डर दिखाया जा रहा है।
रवि नरचल के पत्र पर ही राजस्थान हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस सुनील अंबवानी और जस्टिस अजीत सिंह की खंडपीठ ने अहम फैसला पारित किया था।
जस्टिस अजीत सिंह अभी हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस हैं। अवैध निर्माण सहित आनासागर के चारों ओर बन रही इमारतों को लेकर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कई दिशा निर्देश पारित किए थे। नगर निगम प्रशासन ने हाईकोर्ट के फैसले की पालना करनी तो दूर, उल्टे अपने हिसाब से दिशा निर्देशों की व्याख्या तय कर ली। व्याख्या करते हुए कुछ लोगों को तो राहत दे दी, जो हकदार नहीं थे और जो हकदार हैं, उन पर तोड़फोड़ की तलवार लटकाई हुई है।
व्हिसल-ब्लोअर को सुरक्षा
मामले की शुरुआत चंद्रवरदाई नगर निवासी रवि नरचल द्वारा 13 जनवरी 2015 को चीफ जस्टिस को भेजे गए एक पत्र से हुई थी। नरचल ने हाईकोर्ट में बताया कि उनके इस मुद्दे से कई लोग नाराज हैं और उनकी जान को खतरा है। हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए उन्हें दो बॉडीगार्ड गनमैन उपलब्ध कराए और रिवाल्वर या पिस्टल का लाइसेंस 15 दिन में देने के आदेश दिए थे।
निगम प्रशासन की कार्यशैली पर प्रहार
- नरचल ने याचिका में कुछ अवैध निर्माणों का हवाला देते हुए निगम प्रशासन की कार्यशैली पर प्रहार किया है। उन्हाेंने कहा कि परकोटे के अंदरूनी भाग में जो अवैध निर्माण 1966 के कंपाउंडिंग रूल्स के तहत नियमित होने योग्य हैं और जनहित में नियमित भी किए जा सकते हैं, उनको पेंडिंग रखा हुआ है। वहीं परकोटे के बाहर जहां 1966 के नियम लागू नहीं होते हैं, वहां बने बड़े अवैध निर्माणों को या तो नियमित कर दिया गया है या फिर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है।
याचिका में इन अवैध निर्माणों का हवाला
होटल अजमेर इन
नगर निगम दफ्तर से सौ फीट की दूरी पर बनी होटल अजमेर इन का हवाला अवमानना याचिका में दिया गया है। इसमें बताया है कि इस होटल का निर्माण भी नियम विरुद्ध किया गया है और इसका बड़ा हिस्सा ध्वस्त करने के लिए फाइल भी चली। डीएलबी में भी इस भवन की मालिक सुधा राठौड़ की याचिका खारिज हो चुकी है। इसके बावजूद नगर निगम ने अब तक कार्रवाई नहीं की है।
होटल मेट्रो इन
मार्टिंडल ब्रिज के पास स्थित होटल मेट्रो इन को लेकर भी अवमानना याचिका में मुद्दा उठाया गया है। इस होटल का निर्माण अवैध होने के बावजूद निगम प्रशासन द्वारा कार्रवाई नहीं करने पर सवाल खड़े किए गए हैं।
गिदवानी की बहुमंजिला इमारत
बस स्टैंड के सामने चर्च की जमीन पर बनी मनोज गिदवानी की बहुमंजिला इमारत को लेकर नरचल ने अवमानना याचिका में खुलासा किया है कि इसके बड़े हिस्से को 2014 के कंपाउंडिंग रूल्स के तहत भी नियमन योग्य नहीं माना गया था, लेकिन डीएलबी से मामला निपटने के बावजूद अब तक निगम ने इसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। इसे सीज भी नहीं किया गया है। शेष | पेज 6
शेष अवैध निर्माणों की जानकारी
1. लोहागल रोड स्थित महेश व पुष्पा तेजवानी के अवैध रूप से बने होटल के मामले में हाईकोर्ट ने 5 अगस्त 2015 को अपने फैसले में विशेष दिशा निर्देश दिए थे। इसमें साफ कहा गया था कि जो कंपाउंड योग्य हिस्सा नहीं है उसे 30 दिन में हटाया जाए और जो कंपाउंड होने योग्य है उसे शुल्क लेकर नियमित किया जाए। हाईकोर्ट के इस आदेश को दरकिनार करते हुए नगर निगम के अफसरों ने भवन मालिक से मिलीभगत कर अवैध निर्माण हटाने की बजाए पूरे अवैध निर्माण को ही नियमित कर दिया। महेश तेजवानी का यह निर्माण 1966 के कंपाउंडिंग रूल्स से कवर नहीं होता है, इसके बावजूद इस पर यह कंपाउंडिंग रूल्स लागू मान लिए गए, जो चारदीवारी क्षेत्र के भीतर के लिए हैं।
5. इन सभी अवैध निर्माणों के साथ ही रामगंज में पुष्पा गुप्ता, अशोक करमचंदानी के स्टार मैरिज गार्डन, एनडी ज्वैलर्स, ममता साड़ीज, मदार गेट पर संचेती यात्री निवास का मुद्दा भी उठाया गया है। संचेती के मामले में डीएलबी से याचिका निस्तारित हो जाने के बावजूद निगम प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की है। याचिका में भवन मालिकों से निगम के अफसरों की सांठगांठ का आरोप लगाया है।