पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Ajmer
  • सिंह बंधुओं ने साबित किया जिद के आगे जीत है, पढ़िए बदलाव की कहानी

सिंह बंधुओं ने साबित किया-जिद के आगे जीत है, पढ़िए बदलाव की कहानी

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
अजमेर। यह कहानी है अर्जुनपुरा जागीर गांव के दो भाइयों के संघर्ष की...जिद की...और जीत की। अजमेर से 27 किमी दूर पहाड़ियों की तलहटी में बसा है गांव अर्जुुनपुरा जागीर। यह गांव करीब एक हजार राजपूत परिवारों समेत अन्य वर्गों वाला है। कभी समय था कि शराब ने यहां के सभी युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रखा था।

शराब के नशे ने मानो संवेदनाओं की बलि चढ़ा दी थी। नशे में लड़ाई-झगड़े, पुलिस केस, महिलाओं की परेशानी यहां आम बात हो गई थी। गांव इतना बदनाम हो चुका था कि दूसरे गांव के लोगों ने इस गांव में अपनी बेटी की शादी की बात सोचनी भी बंद कर दी थी। इन सबके बीच यहां के दो भाइयों ने गांव को शराब से पूरी तरह मुक्त कराने की ठानी। काम कठिन था...मगर इनकी सोच बड़ी थी। विरोध भी कम नहीं हुआ...पर इन्होंने साबित कर दिया कि जिद के आगे जीत है। आज पूरे गांव में कहीं भी शराब की बात नहीं होती। शराब की दुकान बंद हो चुकी है। सभी अपने काम में मगन हैं। दोनों भाइयों के संघर्ष, जिद और कैसे मिली जीत, इस पर भास्कर रिपोर्ट।
शराब से बर्बाद होती जिंदगियां देखी तो विरोध में मुहिम की ठानी
गांव में शराब से आए दिन होने वाले लड़ाई-झगड़े, पुरुषों के शराब पीने की लत और उनकी बर्बाद होती जिंदगी को देखकर दोनों भाइयों राजेंद्र सिंह और गंगा सिंह के दिल में कसक सी उठती थी। उसी दौरान गांव में दो महिलाओं की खुदकुशी की घटना ने इन्हें अंदर तक हिला दिया। उन्होंने गांव से शराब को हर हाल में बंद कराने एवं लोगों की सोच बदलने की ठान ली।
मुहिम शुरू की तो सरेआम हाथापाई की नौबत आई, पर इन्होंने हार नहीं मानी
दोनों भाई राजेंद्र सिंह और गंगा सिंह के लिए यह काम आसान नहीं था। शराबबंदी की आवाज उठाई तो उनकी आवाज को दबाने की भरसक कोशिश की गई। शराब के ठेकेदारों व शराबियों ने सरेआम गाली-गलौज की एवं हाथापाई की नौबत पैदा कर दी, पर इन्होंने हार नहीं मानी। इनके इरादे चट्‌टानों की तरह सख्त थे। लोग मुहिम से जुड़ने लगे।
पहली जीत-गांव में शराब ठेका बंद हुआ
राजपूत समाज में महिलाओं में पर्दा प्रथा होने के बावजूद यहां की महिलाएं भी मुहिम में हिस्सेदार बनने लगीं। यहां तक कि चूल्हा-चौका छोड़ गांव से शराब का ठेका हटवाने के लिए एसपी तक जा पहुंचीं। अधिकांश ग्रामीणों का सहयोग मिला। गांव से शराब का ठेका हट गया। यह अभियान की पहली जीत साबित हुई, मगर इससे काम नहीं चला। लोगों का बाहर से शराब लाकर पीने व उत्पात मचाने का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा। लोगों की सोच बदलने का काम अभी बाकी था।

कई बार मामला थाने तक भी पहुंचा, मगर पुलिस भी लाचार रही
शराब के ठेकेदारों ने बाहर से शराब लाकर युवाओं को पिलाकर भड़काना शुरू किया। अभियान से जुड़े लोगोंं से गाली-गलौज की गई तो कभी हाथापाई की गई। कई बार मामला पुलिस थाने तक पहुंचा, लेकिन पुलिस भी इनको पाबंद कर छोड़ने के अलावा कुछ नहीं कर पाई। अब दोनों भाइयों ने नई योजना बनाई।
चौपाल लगाई, जुर्माने का नियम बनाया
शराबबंदी की मुहिम में शामिल ग्रामीणों और दोनों भाइयों ने गांव की चौपाल लगाई और शराब पीकर उत्पात मचाने पर जुर्माना करने की व्यवस्था को लागू करवाने में कामयाबी हासिल कर ली। एक हजार से लेकर ग्यारह हजार रुपए के जुर्माने की राशि भी तय कर दी। जो भी शराब के नशे में जहां मिलता, चौपाल पर बुलवाकर जुर्माना कर उसके परिजनों से राशि वसूल की जाने लगी।
एक-एक लोगों से मिलते, शराब के दुष्परिणाम बताते...और बदलने लगी सोच
दोनों भाई शराबबंदी की मुहिम के तहत प्रतिदिन लोगंों से मिलते, शराब के दुष्परिणाम बताते, अच्छाइयों और उनसे होने वाले बदलाव पर चर्चा करते। देखते-देखते लोगों की सोच बदलने लगी और सभी एक-दूसरे को समझाने लगे। कुछ ही दिनों में बदलाव नजर आने लगा।

...और दूसरे गांवों के लिए मिसाल बन गया अर्जुनपुरा जागीर
आज अब अर्जुनपुरा जागीर गांव दूसरे गांवों के लिए एक मिसाल बन गया है। यहां रात तो क्या, दिन में भी लोग या सरकारी अफसर आने से कतराते थे, अब यहां लोग आराम से आते-जाते हैं। जो युवा पहले नशे की लत के शिकार थे, अब अपने व्यवसाय में मन लगा रहे हैं। पुलिस थाने में भी शराब के कारण आए दिन होने वाले मुकदमों पर रोक लग गई है। यहां के लोग अब दूसरे गांवों में शराब से होने वाले नुकसान के प्रति लोगों की सोच बदलने का काम कर रहे हैं।
खबरें और भी हैं...